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उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा: न्याय की राह पर 20,000 कर्मचारी

उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, सरकार इस पर निर्णय लेने में अब तक असमर्थ रही है। अब मामला फिर से न्याय और कार्मिक विभाग के पाले में है, जिससे 20,000 से अधिक कर्मचारियों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।



नियमितीकरण का मामला: क्या है पूरा विवाद?

  • 12 नवंबर 2018 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के चरणबद्ध तरीके से नियमितीकरण का आदेश दिया था।

  • कोर्ट ने सरकार को समान कार्य के लिए समान वेतन और जीएसटी से छूट देने को भी कहा था।

  • सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 15 अक्तूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया।



अब न्याय विभाग और कार्मिक विभाग की राय जरूरी

सरकार ने अब इस मामले में न्याय विभाग और कार्मिक विभाग से सलाह मांगी है

  • कार्मिक विभाग: यह विभाग नियमितीकरण की नीति बनाने के लिए जिम्मेदार है।

  • न्याय विभाग: कोर्ट केस पर आगे की कानूनी रणनीति तय करेगा।


हाईकोर्ट में अवमानना याचिका, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

  • सुप्रीम कोर्ट में केस हारने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

  • इस बीच, कुछ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी

  • हाईकोर्ट ने 25 फरवरी 2025 को सरकार से 4 हफ्तों के भीतर जवाब मांगा


क्या 20,000 कर्मचारियों को मिलेगा न्याय?

यदि हाईकोर्ट का आदेश लागू होता है, तो 20,000 से अधिक उपनल कर्मचारी स्थायी नौकरी पा सकेंगे।
उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल और महामंत्री विनय प्रसाद ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।



सरकार के सामने क्या विकल्प हैं?

  1. हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर कर्मचारियों को नियमित करना।

  2. सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर फैसले का इंतजार करना।

  3. कोर्ट के आदेशों में कोई लीगल खामी ढूंढकर इसे चुनौती देना।


उपनल कर्मचारियों का नियमितीकरण उत्तराखंड में न्याय और रोजगार से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सरकार की उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि न्याय और कार्मिक विभाग की राय के बाद सरकार क्या कदम उठाती है। यदि कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय होता है, तो यह उत्तराखंड के हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर होगी।


आपकी क्या राय है?

 सरकार को तुरंत कर्मचारियों को नियमित करना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें!

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