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22 साल बाद अनोखा संयोग: जब होली के रंगों में घुलेंगे फूलदेई के फूल

त्योहार केवल तिथियों के हिसाब से मनाए जाने वाले पर्व नहीं होते, बल्कि वे हमारी परंपराओं, आस्थाओं और समाज को जोड़ने वाले सूत्र होते हैं। इस बार होली का त्योहार और उत्तराखंड का पारंपरिक पर्व फूलदेई एक साथ मनाया जाएगा, जो 22 साल बाद बनने वाला एक दुर्लभ संयोग है। इससे पहले साल 2003 में ऐसा हुआ था जब दोनों पर्व एक ही दिन आए थे।




होली और फूलदेई का संयोग क्यों खास है?

होली रंगों, उमंग और भाईचारे का त्योहार है, जबकि फूलदेई उत्तराखंड में वसंत ऋतु के स्वागत का पर्व है, जिसे घर की देहरी पर फूल बिछाकर मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि और चैत्र संक्रांति एक साथ पड़ रही हैं, जिससे यह अद्भुत संयोग बना है।


ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी के अनुसार, चैत्र प्रतिपदा शुक्रवार, 14 मार्च को होगी, जो चैत्र माह की शुरुआत का संकेत देती है। इस दिन घर-घर में फूलदेई का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें बच्चे घरों की देहरी पर फूल चढ़ाते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं।

वहीं, डॉ. नवीन चंद्र जोशी बताते हैं कि पूर्णिमा की तिथि गुरुवार रात 10:38 बजे शुरू होकर शुक्रवार दोपहर 12:27 बजे तक रहेगी। इसके चलते दोपहर 12:27 बजे के बाद होली खेलने का शुभ मुहूर्त रहेगा, जबकि फूलदेई का पूजन पूरे दिन किया जा सकता है।




उत्तराखंड में फूलदेई का महत्व

फूलदेई पर्व विशेष रूप से उत्तराखंड में मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति और मानव के रिश्ते को दर्शाता है। बच्चों द्वारा घर-घर जाकर बुरांश, फ्योंली, गुलाब और अन्य जंगली फूलों को देहरी पर सजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके बदले में उन्हें चावल, गुड़, और पैसे दिए जाते हैं, जो इस पर्व को सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक बनाते हैं।

इस बार फूलदेई होली के रंगों में और भी सुंदरता घोलेगी, क्योंकि जहां एक तरफ गुलाल और अबीर की बौछार होगी, वहीं दूसरी ओर प्रकृति के फूलों की खुशबू इस पर्व को और पावन बना देगी।



होली और फूलदेई दो दिन मनाई जाएगी

इस बार कई जगहों पर होली दो दिन मनाई जाएगी। कुछ लोग शुक्रवार (14 मार्च) को तो कुछ शनिवार (15 मार्च) को होली खेलेंगे। इसका कारण उदयातिथि मानी जा रही है, जिसके अनुसार कुछ क्षेत्रों में अगले दिन भी होली मनाई जाएगी। इसी तरह, कुछ क्षेत्रों में फूलदेई का आयोजन भी अगले दिन किया जाएगा।



होली और फूलदेई का यह अद्भुत संयोग उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को एक नई ऊर्जा देगा। 22 साल बाद आ रहे इस अवसर को और खास बनाने के लिए इस बार रंगों के साथ फूलों का उत्सव भी मनाएं। यह संयोग सिर्फ पंचांग में दर्ज एक तिथि नहीं है, बल्कि हमारी विरासत, लोक परंपरा और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का एक अनुपम अवसर है। तो इस बार होली सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि फूलों की सुगंध से भी महकने वाली है!

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