हल्द्वानी में शाम 6 बजे के बाद नहीं लगेंगे नॉनवेज ठेले – महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता
हल्द्वानी नगर निगम ने नगर क्षेत्र में शाम 6 बजे के बाद मांसाहारी खाद्य ठेलों और फूड वैन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सड़क किनारे शराबियों के जमावड़े को रोकना और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
नगर निगम को लंबे समय से शाम के समय सड़कों पर असुरक्षित माहौल बनने की शिकायतें मिल रही थीं। विशेष रूप से नॉनवेज ठेलों के पास शराबियों की भीड़ जमा होने से महिलाओं और छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पिछले कार्यशालाओं में भी छात्राओं ने इन स्थानों को असुरक्षित बताया था, जिसके बाद नगर निगम ने छह बजे के बाद नॉनवेज ठेले और फूड वैन पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
नगर निगम पहले भी इन ठेलों और फूड वैन पर जुर्माने की कार्रवाई कर चुका है, लेकिन इसका खास असर नहीं दिखा। शाम होते ही कई स्थानों पर शराब पीने और हुड़दंग करने की घटनाएं बढ़ जाती थीं, जिससे महिलाएं असहज महसूस करती थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम अब सख्ती से इस नियम को लागू करने जा रहा है।
ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर भी कार्रवाई होगी
इसके अलावा, नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी ढाबे या रेस्टोरेंट में शराब परोसी जाती पाई गई, तो उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। इससे शहर में अवैध रूप से शराब परोसने वाले प्रतिष्ठानों पर भी अंकुश लगेगा।
खाद्य पदार्थों की जांच भी हुई
इसी बीच, खाद्य सुरक्षा विभाग ने हल्द्वानी और रामनगर में अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।
- रामनगर में गुजिया और घी के सैंपल लिए गए।
- हल्द्वानी में रिफाइंड तेल और दूध के सैंपल की जांच की गई।
होली के त्यौहार को देखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है।
यह फैसला कितना प्रभावी होगा?
नगर निगम के इस कदम से निश्चित रूप से महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाने में मदद मिलेगी। लेकिन इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या यह प्रतिबंध ठेला संचालकों और छोटे व्यापारियों के लिए कोई नया संकट तो नहीं खड़ा करेगा। प्रशासन को चाहिए कि वैकल्पिक समाधान भी तलाशे जाएं, ताकि रोज़गार पर असर न पड़े।
नगर निगम का यह फैसला सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना होगा कि यह फैसला जमीनी स्तर पर कितना कारगर साबित होता है।




Post a Comment