Super money

क्या UPI और Rupay card से लेनदेन पर फिर से वसूला जाएगा मर्चेंट शुल्क?

📍 द कुमाऊं कनेक्शन

देश में डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच अब एक नया प्रस्ताव सामने आया है, जिसे लेकर व्यापारियों और ग्राहकों के बीच हलचल मची हुई है। सरकार अब यूपीआई (UPI) और रुपे डेबिट कार्ड (Rupee Debit Card) के जरिए होने वाले लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फिर से लागू करने पर विचार कर रही है।



यह प्रस्ताव बैंकों और भुगतान कंपनियों की तरफ से सरकार को भेजा गया है। इस प्रस्ताव के तहत, सालाना 40 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार करने वाले व्यापारियों से शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा


📌 क्या है एमडीआर?

एमडीआर (Merchant Discount Rate) वह शुल्क है, जो व्यापारी बैंक को डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया के लिए देते हैं। जब ग्राहक यूपीआई या डेबिट कार्ड से भुगतान करता है, तो बैंक और भुगतान कंपनियों को डिजिटल ट्रांजेक्शन को पूरा करने के लिए आईटी सिस्टम का खर्च आता है। इसी खर्च की भरपाई के लिए मर्चेंट शुल्क वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है।

वर्तमान में यूपीआई और रुपे कार्ड से लेन-देन निशुल्क होता है, लेकिन बैंकों का तर्क है कि जब बड़े व्यापारी वीजा और मास्टरकार्ड के लिए पहले से एमडीआर भुगतान कर रहे हैं, तो यूपीआई और रुपे कार्ड के लिए क्यों नहीं?




📌 किसे होगा नुकसान और किसे फायदा?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बड़े व्यापारी जो हर महीने लाखों-करोड़ों का डिजिटल लेन-देन करते हैं, उन्हें इस शुल्क का भुगतान करना होगा। वहीं, छोटे व्यापारी और आम लोग इससे प्रभावित नहीं होंगे।

बैंकों और भुगतान कंपनियों का कहना है कि यूपीआई अब सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला भुगतान टूल बन चुका है, और इसलिए इसके खर्च को अब सरकार नहीं उठाएगी, बल्कि व्यापारियों से शुल्क लिया जाएगा।



📌 क्या व्यापारियों के लिए यह प्रस्ताव उचित है?

बड़े कारोबारियों के लिए इस शुल्क का भुगतान एक भारी खर्च हो सकता है। हालांकि, व्यापारियों का यह भी कहना है कि वे इस शुल्क को ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जैसा कि पहले से वे क्रेडिट कार्ड के भुगतान पर एमडीआर का भार ग्राहकों पर डालते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस शुल्क के लागू होने के बाद ग्राहकों को कुछ अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि व्यापारियों के पास इसे ग्राहकों पर डालने का विकल्प है, जैसा कि क्रेडिट कार्ड के भुगतान पर किया जाता है।


📌 डिजिटल भुगतान के भविष्य पर असर?

इस प्रस्ताव के लागू होने से डिजिटल भुगतान के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है। अगर व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर डालते हैं, तो ग्राहकों के लिए डिजिटल भुगतान का आकर्षण कम हो सकता है। वहीं, छोटे व्यापारियों के लिए भी यह एक अतिरिक्त बोझ बन सकता है, जिनके लिए डिजिटल भुगतान के सिस्टम में आने वाली लागत पहले ही भारी पड़ रही है।

इसके अलावा, सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी में भी कमी की जा चुकी है, जो इस व्यवस्था को और कठिन बना सकती है


📌 सरकार का कदम: सही या गलत?

सरकार का यह कदम वित्तीय संस्थानों के लिए वित्तीय दबाव को हल्का करने के उद्देश्य से हो सकता है, लेकिन इससे व्यापारी और ग्राहक दोनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। यह कदम डिजिटल भुगतान के विकास को प्रभावित कर सकता है, खासकर छोटे व्यापारियों के लिए, जिनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं होते।

क्या यह कदम डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देगा, या इसे फिर से महंगा बना देगा? इस पर आने वाले समय में और भी चर्चा हो सकती है।




📌 हमारी राय
हमारा मानना है कि डिजिटल भुगतान को सस्ता और आसान बनाए रखना बहुत जरूरी है। सरकार को इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले इसके सभी पहलुओं पर गहन विचार करना चाहिए, ताकि छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त दबाव न आए


क्या आप इस कदम का समर्थन करते हैं? क्या आपको लगता है कि यह डिजिटल भुगतान को नुकसान पहुंचाएगा? हमें अपने विचार कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।

कोई टिप्पणी नहीं

merrymoonmary के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.