30 मई तक प्रमोशन सूची नहीं तो शिक्षकों का असहयोग आंदोलन, सिर्फ पढ़ाएंगे, बाकी काम ठप
देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय विद्यालयों में कार्यरत एलटी और प्रवक्ता शिक्षकों ने सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है। यदि 30 मई तक प्रमोशन सूची जारी नहीं की जाती और क्रमबद्ध स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो शिक्षक 1 जून से असहयोग आंदोलन पर उतरेंगे। इस आंदोलन के तहत वे केवल अध्यापन कार्य करेंगे, किसी भी प्रकार का शिक्षणेत्तर कार्य नहीं करेंगे। साथ ही प्रभारी प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों का सामूहिक रूप से त्याग किया जाएगा।
यह निर्णय मंगलवार को राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया, जो जीआईसी पटेलनगर, देहरादून में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने की और संचालन महामंत्री रमेश पैन्युली ने किया। बैठक में शिक्षक नेताओं ने सरकार और शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षों से लंबित प्रमोशन और स्थानांतरण जैसे मामलों में अनदेखी की जा रही है, जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष है।
राज्य स्तरीय कार्यालयों का बहिष्कार
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक शिक्षकों की प्रमुख मांगों – पदोन्नति और स्थानांतरण – पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक राजकीय शिक्षक संघ का कोई भी पदाधिकारी राज्य स्तरीय कार्यालयों में नहीं जाएगा। संघ अब अपनी मांगें अधिकारियों को सीधे न सौंपकर, राज्य स्तरीय कार्यालयों के मुख्य द्वार पर टांगकर अपना विरोध प्रकट करेगा।
1 जून से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन
बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि सरकार द्वारा 30 मई तक मांगे पूरी नहीं की जातीं तो 1 जून से शीतकालीन विद्यालयों और 1 जुलाई से ग्रीष्मकालीन विद्यालयों में शिक्षक केवल शिक्षण कार्य करेंगे। वे किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्यों—जैसे परीक्षा ड्यूटी, सरकारी सर्वेक्षण, निर्वाचन ड्यूटी आदि—में भाग नहीं लेंगे। साथ ही प्रभारी प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक जैसे अतिरिक्त दायित्वों से भी त्यागपत्र देंगे। इसके बावजूद भी अगर शासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तो प्रदेशव्यापी तालाबंदी या कार्यबहिष्कार जैसे कठोर कदम उठाए जाएंगे।
संघ ने उठाए अन्य मुद्दे भी
बैठक में अटल योजना के तहत कार्यरत शिक्षकों को चयनित शिक्षकों की तरह लाभ देने, चयन पदोन्नति पर वेतन वृद्धि, वेतन विसंगति को दूर करने, अंतरमंडलीय स्थानांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने, शारीरिक शिक्षा और कला जैसे विषयों को मुख्य पाठ्यक्रम में शामिल कर प्रवक्ता पद सृजित करने तथा यात्रा अवकाश बहाल करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्राथमिकता सिर्फ पदोन्नति और स्थानांतरण की मांग को दी जाएगी।
छोटे प्रकरणों में भी हो रही है अनदेखी
शिक्षक नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विभाग द्वारा शिक्षकों के छोटे से छोटे प्रकरणों को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे कई बार शिक्षकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ती है। इससे न केवल प्रक्रिया बाधित होती है, बल्कि पदोन्नति, स्थानांतरण, गोपनीय प्रविष्टि और अन्य प्रशासनिक कार्यों में अनियमितता उत्पन्न होती है। संगठन ने विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
ब्लॉक और जनपद स्तरीय चुनाव की तैयारी
बैठक में मई माह में ब्लॉक स्तरीय और जनपद स्तरीय संघ के चुनाव संपन्न कराने का भी निर्णय लिया गया। इसके लिए प्रांतीय कार्यकारिणी ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की कार्यकारिणी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।
बैठक में मौजूद प्रमुख पदाधिकारी
इस अहम बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री रमेश पैन्युली, उपाध्यक्ष राजकुमार चौधरी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सजवाण, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष श्याम सिंह सरियाल, कुमाऊं मंडल अध्यक्ष डॉ. गोकुल मार्तोलिया, गढ़वाल मंडल मंत्री डॉ. हेमंत पैन्युली, कुमाऊं मंडल मंत्री रविशंकर गुसाईं सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा अरुण रमोला, चंडी प्रसाद नौटियाल, शिवराज बनकोटी और दीपक अरोड़ा जैसे पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे।

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