हल्द्वानी में भोजन माताओं का हल्ला बोल, न्यूनतम वेतन 18 हजार समेत कई मांगों को लेकर किया प्रदर्शन
हल्द्वानी, 4 मई 2025:
हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में आज प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, उत्तराखंड (नैनीताल इकाई) के बैनर तले राज्य की सैकड़ों भोजन माताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध पार्क से हुई, जहां संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी समस्याओं को उजागर किया। इसके पश्चात बुद्ध पार्क से एसडीएम कोर्ट तक एक रैली भी निकाली गई, जिसमें भारी संख्या में भोजन माताएं शामिल रहीं।
धरना प्रदर्शन के दौरान भोजन माताओं ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
-
न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये लागू किया जाए।
-
भोजन माताओं को स्थाई किया जाए।
-
प्रसूति अवकाश की सुविधा दी जाए।
-
विद्यालयों में प्रत्येक 26 बच्चों पर एक भोजन माता की नियुक्ति सुनिश्चित हो।
-
वेतन और बोनस समय पर दिया जाए।
-
अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा बनाए जाने वाले भोजन पर रोक लगाई जाए।
भोजन माताओं का कहना है कि उन्हें मात्र 3000 रुपये मासिक वेतन मिलता है, जो बेहद अपमानजनक और असमान्य है। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि यह वेतन उन्हें केवल 11 महीनों के लिए ही दिया जाता है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान उन्हें किसी प्रकार का वेतन नहीं दिया जाता, जिससे उनके परिवार की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाता है।
प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों ने बताया कि भोजन माताओं से विद्यालयों में केवल मध्यान्ह भोजन ही नहीं, बल्कि झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोने, यहां तक कि बच्चों को संभालने जैसे अनेक कार्य करवाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मजदूरी के नाम पर केवल 100 रुपये प्रतिदिन भी नहीं मिलते। यह स्थिति महिलाओं के श्रम शोषण का एक स्पष्ट उदाहरण है।
संगठन की मांग है कि सरकारी कर्मचारी की भांति उन्हें स्थायी किया जाए, ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य लाभ मिल सकें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निजी संस्थाएं, जैसे कि अक्षय पात्र फाउंडेशन, सरकार की शह पर भोजन की आपूर्ति का ठेका ले रही हैं, जिससे हजारों भोजन माताओं का रोजगार छिनने का खतरा मंडरा रहा है।
प्रदर्शन के बाद भोजन माताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे शीघ्र नहीं मानी गईं, तो वे आगामी दिनों में विधानसभा का घेराव करने और राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होंगी।
इस धरना प्रदर्शन में संगठन की जिला अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और प्रभावित भोजन माताएं मौजूद रहीं। सभी ने एक स्वर में सरकार से न्याय की गुहार लगाई और कहा कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
हल्द्वानी में हुआ यह प्रदर्शन न केवल भोजन माताओं की जमीनी परेशानियों को उजागर करता है, बल्कि सरकार के उन दावों पर भी सवाल खड़े करता है, जिसमें महिला सशक्तिकरण और गरीबों के हित की बात की जाती है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है और कब तक इन संघर्षरत महिलाओं को उनका अधिकार मिलता है।




Post a Comment