उत्तराखंड - स्कूलों में नैतिक शिक्षा का समावेश :गीता पाठ अनिवार्य
देहरादून। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, कैंप कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई महत्त्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। बैठक में छात्रों की पाठ्यचर्या में श्रीमद्भागवत गीता को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक शिक्षा को विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सके।
बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि दिसंबर 2026 तक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित ‘रजतोत्सव कैलेंडर’ तैयार किया जाए। इस कैलेंडर के माध्यम से शिक्षा विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और सफलताओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे प्रदेश में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनेगा।
अधिकारियों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बरसात शुरू होने से पहले प्रदेश के सभी स्कूलों का भौतिक निरीक्षण किया जाए। इस निरीक्षण में स्कूल भवनों की स्थिति, छतों की मरम्मत, पानी निकासी की व्यवस्था, शौचालय और अन्य आधारभूत सुविधाओं की जांच की जाएगी ताकि बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।
क्लस्टर विद्यालयों में आवासीय सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए अन्य राज्यों की ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन करने को भी कहा गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उत्तराखंड के ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके अतिरिक्त, 559 क्लस्टर विद्यालयों की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक ठोस प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि हर वर्ष पाठ्य पुस्तकें समय पर छात्रों को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई व्यवधान न हो। पाठ्यपुस्तकों की छपाई, आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही, एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) और एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना) जैसी गतिविधियों को स्कूलों में और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए चरणबद्ध योजना बनाने को कहा गया है। जिन स्कूलों में वर्तमान में इन योजनाओं की सुविधा नहीं है, वहां प्राथमिकता के आधार पर चयन कर उन्हें इस योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक सेवा की भावना का विकास हो सके।
इस बैठक में प्रदेश के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, योजना प्रकोष्ठ के सदस्य और जिलास्तरीय अधिकारियों ने भाग लिया। यह निर्णय प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, मजबूत और नैतिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण बनाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।



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