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ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी के लिए बीडीसी मेंबर ‘हाईजैक’? जानिए पूरा मामला

द कुमाऊं कनेक्शन, नैनीताल।

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सियासत की इस गर्मी में बीडीसी (क्षेत्र पंचायत सदस्य) के कई नवनिर्वाचित सदस्य अचानक अपने गांवों से लापता हो गए हैं, जिससे चुनाव की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

परिजन भी खामोश, गहराया संदेह

रामगढ़, बेतालघाट, भीमताल और ओखलकांडा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के कई गांवों में बीडीसी सदस्यों के अचानक गायब होने की चर्चा तेज है। हैरानी की बात यह है कि उनके परिजन भी इस विषय में कुछ कहने से बच रहे हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

'होटल पॉलिटिक्स' का दौर, गुप्त निगरानी जारी

सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक प्रमुख पद के संभावित दावेदारों ने अपने पक्ष में मतदान सुनिश्चित करने के लिए बीडीसी सदस्यों को रिजॉर्ट्स और होटलों जैसे गुप्त स्थानों पर पहुंचाया है, जहां उनकी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि उन्हें विभिन्न प्रलोभनों के माध्यम से साधने का प्रयास किया जा रहा है।

लोकतंत्र की पारदर्शिता पर सवाल

इस घटनाक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर चिंता पैदा कर दी है। मतदाताओं का मानना है कि यह 'होटल पॉलिटिक्स' लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। चुनाव जीतने के लिए इस तरह की रणनीति पारदर्शी चुनाव प्रणाली की भावना के विपरीत है।

कोई शिकायत दर्ज नहीं, लेकिन चर्चाएं तेज

अब तक किसी बीडीसी सदस्य की गुमशुदगी की आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन ग्रामीणों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मतगणना के दिन के बाद से अपने प्रतिनिधियों को नहीं देखा। कुछ गांवों में यह भी चर्चा है कि सदस्यों को एक ही होटल में रखा गया है ताकि विपक्षी पक्ष के लोग उनसे संपर्क न कर सकें।



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