स्कूल टाइम में बाजार में घूमते दिखे शिक्षक, खण्ड शिक्षा अधिकारी ने लगाई क्लास ..
बाराकोट (चम्पावत)।
खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 11 फरवरी 2026 को बाराकोट बाजार में अपराह्न 03:00 बजे के दौरान कुछ दूरस्थ विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक देखे गए। जब विद्यालय समय से पूर्व छोड़े जाने के संबंध में उनसे जानकारी ली गई, तो उनके द्वारा गुलदार के आतंक का हवाला दिया गया, जिसे संतोषजनक नहीं माना गया।
जांच के दौरान यह प्रतीत हुआ कि कुछ विद्यालयों में विभाग द्वारा निर्धारित समय सारिणी का विधिवत पालन नहीं किया जा रहा है, जो कि अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी ने विकासखंड बाराकोट के अंतर्गत आने वाले समस्त प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
आदेश में कहा गया है कि विद्यालयों का संचालन विभागीय समय सारिणी के अनुसार अनिवार्य रूप से किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित शिक्षक या कार्मिक स्वयं उत्तरदायी होंगे तथा उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षा विभाग का यह कदम विद्यालयों में शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी
शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और मानवीय परिस्थितियों के बीच संतुलन जरूरी।
विद्यालयों के संचालन समय को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी निर्देशों ने एक बार फिर स्कूलों में अनुशासन और शिक्षकों की व्यावहारिक परिस्थितियों पर चर्चा को तेज कर दिया है। विभागीय निरीक्षण के दौरान विद्यालय समय में कुछ शिक्षक बाजार क्षेत्र में देखे जाने की सूचना के बाद अधिकारियों ने समय सारिणी के विधिवत पालन पर जोर दिया है।
विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय संचालन के लिए निर्धारित समय सारिणी का पालन छात्रों के शैक्षणिक हितों के लिए आवश्यक है। समय से पूर्व विद्यालय छोड़े जाने की स्थिति में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है, जिसे गंभीरता से लिया जाना स्वाभाविक है।
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वहीं दूसरी ओर, शिक्षकों का पक्ष भी पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को कभी-कभी स्थानीय, पारिवारिक अथवा प्रशासनिक कारणों से अस्थायी रूप से विद्यालय से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और पूर्व सूचना की व्यवस्था यदि मजबूत हो, तो अनावश्यक विवाद से बचा जा सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सख्ती के साथ-साथ संवाद और स्पष्ट दिशा-निर्देश भी उतने ही जरूरी हैं। यदि विद्यालय प्रबंधन और शिक्षक विभागीय नियमों के तहत समन्वय बनाकर कार्य करें, तो न केवल अनुशासन बना रहेगा बल्कि शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव भी नहीं पड़ेगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी यह निर्देश व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। अब आवश्यकता इस बात की है कि नियमों के पालन के साथ-साथ मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए, ताकि शिक्षा का मूल उद्देश्य—छात्रों का सर्वांगीण विकास—प्रभावित न हो ।

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