Super money

​उत्तराखंड: होली पर संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को वेतन का इंतजार, क्या यूपी की तर्ज पर जगेगी धामी सरकार?

देहरादून

रंगों का त्योहार होली दहलीज पर है, लेकिन उत्तराखंड के हजारों संविदा, उपनल और आउटसोर्स कर्मचारियों के चेहरों पर इस बार फीकी मुस्कान है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में रीढ़ की हड्डी बनकर काम कर रहे इन कर्मचारियों को चिंता सता रही है कि क्या इस बार उनकी होली बिना वेतन के गुजरेगी?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को 2 मार्च से पहले वेतन देने के आदेश के बाद अब उत्तराखंड के कर्मचारी भी धामी सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।

7 से 15 तारीख का 'वेतन चक्र' बनी मुसीबत

उत्तराखंड में संविदा ,आउटसोर्सिंग ,दैनिक वेतनभोगी और उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या वेतन का समय पर न मिलना है। अमूमन इन कर्मचारियों का वेतन महीने की 7 तारीख से लेकर 15 तारीख के बीच आता है। चूंकि इस बार होली 4 मार्च को है, ऐसे में अगर नियत समय पर वेतन आया, तो इन हजारों परिवारों के लिए त्योहार की खुशियां और खरीदारी केवल एक सपना बनकर रह जाएगी।

हजारों परिवारों की खुशियां दांव पर

राज्य के स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में तैनात ये कर्मचारी अल्प मानदेय पर काम करते हैं। इनके लिए एक महीने की देरी का मतलब है—किराना उधार, बच्चों की फीस में देरी और त्योहार पर खाली हाथ।

"हम दिन-रात सरकारी तंत्र को चलाने में मदद करते हैं, लेकिन त्योहारों पर हमें ही सबसे ज्यादा आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। अगर सरकार फरवरी का वेतन 2 मार्च तक जारी कर दे, तो हमारी होली भी रंगीन हो सकती है।"  — (एक व्यथित आउटसोर्स कर्मचारी)

सरकार से उम्मीद: 'यूपी' की तर्ज पर हो फैसला

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स और संविदा कर्मियों समेत सभी को होली से पहले वेतन देने का लिखित आदेश जारी हो सकता है, तो 'मित्र पुलिस' और 'आदर्श राज्य' का दावा करने वाली उत्तराखंड सरकार पीछे क्यों है?

महानिदेशक का सख्त आदेश: संविदा और आउटसोर्स समेत सभी कर्मियों को होली पूर्व मिले सैलरी -

मुख्य मांगें:

  • फरवरी माह का वेतन: हर हाल में 2 मार्च 2026 से पहले खातों में डाला जाए।
  • बजट की उपलब्धता: शासन स्तर से विभागों को तत्काल बजट रिलीज करने के निर्देश दिए जाएं।
  • समान नीति: स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ उपनल और आउटसोर्स कर्मियों को भी प्राथमिकता मिले।

निष्कर्ष:

अब गेंद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पाले में है। क्या सरकार इन 'अदृश्य नायकों' की पुकार सुनेगी? क्या इस बार उपनल और आउटसोर्स कर्मियों के घरों में भी सरकारी आदेश की बदौलत गुझिया की मिठास घुलेगी? यह आने वाले एक-दो दिन तय करेंगे।


कोई टिप्पणी नहीं

merrymoonmary के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.