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धामी सरकार का बड़ा फैसला: न्यूनतम मजदूरी में शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च जोड़ा जाएगा

देहरादून:

उत्तराखंड में श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग ने “मजदूरी संहिता नियमावली 2026” का मसौदा जारी कर दिया है। इस प्रस्तावित नियमावली में श्रमिकों के कार्य घंटे, न्यूनतम मजदूरी निर्धारण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए गए हैं। विभाग ने इस मसौदे पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव भी मांगे हैं।

सबसे बड़ा बदलाव कार्य अवधि को लेकर किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, श्रमिकों से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे तक ही काम लिया जा सकेगा। इससे अधिक काम कराने पर नियोक्ता को ओवरटाइम का अलग से भुगतान करना होगा। इसके साथ ही, लगातार काम करने के बाद श्रमिकों को विश्राम देने का प्रावधान भी अनिवार्य किया गया है।

न्यूनतम मजदूरी तय करने की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब मजदूरी केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से तय की जाएगी। इसमें श्रमिक के दैनिक खर्चों को आधार बनाया जाएगा, जिसमें भोजन, कपड़ा, आवास के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतों का खर्च भी शामिल होगा। खास बात यह है कि बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा पर होने वाले खर्च को भी न्यूनतम मजदूरी का हिस्सा माना जाएगा।

मसौदे के अनुसार, श्रमिकों की श्रेणियों में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों की तीन श्रेणियां थीं, वहीं अब एक नई श्रेणी “अत्यधिक कुशल श्रमिक” को भी जोड़ा गया है। इससे उच्च कौशल वाले श्रमिकों को बेहतर मजदूरी और सुविधाएं मिलने की संभावना है।

महिला श्रमिकों के संदर्भ में भी नियमों का दायरा बढ़ाया गया है। अब परिवार की परिभाषा में पति-पत्नी के अलावा 21 वर्ष तक के आश्रित बच्चे, अविवाहित पुत्रियां, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम संतान और आश्रित माता-पिता को शामिल किया गया है। महिला श्रमिकों के मामले में सास-ससुर को भी परिवार का हिस्सा माना जाएगा, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ पूरे परिवार तक पहुंच सकेगा।

ओवरटाइम को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई श्रमिक तय समय से अधिक काम करता है, तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर पर भुगतान करना अनिवार्य होगा।

श्रम विभाग ने इस मसौदे पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इच्छुक व्यक्ति ईमेल के माध्यम से अपने सुझाव विभाग को भेज सकते हैं।

यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो उत्तराखंड में श्रमिकों के कार्य परिस्थितियों और जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिल सकता है। खासतौर पर शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च को मजदूरी में शामिल करने से श्रमिक परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

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