बीएससी एमएलटी संवर्ग का धरना: 100 दिन पूरे, 26 साल से उपेक्षा का आरोप; सरकार से उम्मीदें बढ़ीं
देहरादून:
उत्तराखंड में बीएससी एमएलटी (Bachelor of Science in Medical Laboratory Technology) संवर्ग की चार सूत्रीय मांगों को लेकर एकता बिहार में चल रहा धरना अब 100 दिन पूरे कर चुका है। लगातार 100 दिनों के संघर्ष के बाद आंदोलनरत लैब टेक्नीशियनों ने अब सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद जताई है।
प्रमुख बिंदु और आंदोलन की रूपरेखा
- 100 दिनों का संघर्ष: अपनी मांगों के समर्थन में लैब टेक्नीशियनों ने न सिर्फ धरना जारी रखा, बल्कि इस दौरान सचिवालय कूच और मुख्यमंत्री आवास का दो बार घेराव भी किया।
- मुख्यमंत्री से मुलाकात: लगातार प्रदर्शन के बाद सरकार की पहल पर आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई। 11 अगस्त को हुई इस बैठक में संवर्ग की सभी प्रमुख समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखी गईं।
- 26 साल से उपेक्षा का आरोप: आंदोलनकारियों का कहना है कि वे बीते 26 वर्षों से सेवा नियमावली जैसी मूलभूत व्यवस्था से वंचित हैं और लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।
- शासन स्तर पर बैठक: मुख्यमंत्री द्वारा मामले का संज्ञान लेते हुए वित्त सचिव, कार्मिक सचिव और प्रमुख सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद शासन की ओर से आगामी 31 तारीख को एक उच्चस्तरीय बैठक का पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया गया है।
लैब टेक्नीशियनों की चार प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि आगामी शासन स्तर की बैठक में उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- आईपीएचएस (IPHS) मानकों के अनुरूप पदों का सृजन: स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीय मानकों के तहत नए और पर्याप्त पदों का गठन किया जाए।
- वर्षवार मेरिट के आधार पर भर्ती: चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्राथमिकता के लिए वर्षवार मेरिट सूची के आधार पर नियुक्तियां की जाएं।
- आयु सीमा में छूट: लंबे समय से सेवा से वंचित और ओवरऐज हो रहे योग्य लैब टेक्नीशियनों के लिए आयु सीमा में विशेष छूट दी जाए।
- निजीकरण पर रोक और नियमित नियुक्ति: सरकारी लैबों के निजीकरण को पूरी तरह समाप्त किया जाए और निजी कंपनियों के बजाय नियमित सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
आगे की चेतावनी
संघ के महासचिव मयंक राणा ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार आगामी बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो यह वर्षों से संघर्ष कर रहे लैब टेक्नीशियनों के लिए एक बड़ी राहत होगी। हालांकि, यदि ऐसा नहीं होता है, तो उन्हें एक बार फिर उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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