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बिना अनुमति स्कूलों में प्रवेश पर शिक्षकों की आपत्ति: सोशल मीडिया पर प्रचार या शिक्षा व्यवस्था की पड़ताल?

 देहरादून, 11 मार्च 2025


उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश कर बच्चों के वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर वायरल करने की घटनाओं ने राज्य के शिक्षकों को नाराज कर दिया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि कुछ लोग प्रचार पाने के लिए स्कूलों में जाकर पूर्व निर्धारित मानसिकता के साथ वीडियो बना रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था की नकारात्मक छवि प्रस्तुत की जा रही है।



शिक्षकों की नाराजगी क्यों?

हाल ही में चमोली जिले के एक स्कूल में एक युवक के बिना अनुमति प्रवेश कर वीडियो बनाने की घटना सामने आई थी। जब शिक्षकों ने उसे रोका तो उसने धमकी भी दी। इस घटना को लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी को शिकायत भेजी गई है और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।


शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री रमेश चंद्र पैन्यूली ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया और कहा कि ऐसे लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सरकारी स्कूलों की छवि बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।


शिक्षा व्यवस्था पर सवाल या शिक्षकों को निशाना?

शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी मेहनत और समर्पण के साथ पढ़ाते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर सिर्फ नकारात्मक पहलू दिखाने के लिए वीडियो एडिट कर पेश किए जाते हैं।


जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने इस पर सख्त एसओपी लागू करने की मांग की है, ताकि बिना अनुमति कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूलों में प्रवेश न कर सके।


स्कूलों की सुरक्षा भी दांव पर

शिक्षकों का यह भी कहना है कि बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करने से बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट किया है कि बिना संस्थानाध्यक्ष की अनुमति स्कूल में प्रवेश करना गैरकानूनी है। इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को निर्देश जारी किए गए हैं कि स्कूलों में सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाए।



समाधान क्या हो?

सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संवाद जरूरी है, लेकिन उसका तरीका सही होना चाहिए।


यदि किसी को सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाने हैं, तो शिक्षा अधिकारियों से बातचीत करनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर बिना संदर्भ के वीडियो पोस्ट करने से गलत संदेश जाता है।

बच्चों की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए बिना अनुमति वीडियो बनाने पर रोक लगनी चाहिए।

आपकी राय क्या है?

क्या बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश करने पर रोक लगाना सही है? या फिर शिक्षा व्यवस्था पर खुली चर्चा के लिए इसे स्वीकार किया जाना चाहिए? 


अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।


— 'कुमाऊं कनेक्शन' के लिए विशेष रिपोर्ट













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