बच्चों की गलती या सिस्टम का फेलियर? 12वीं की पूरी क्लास हुई फेल
विकासनगर, देहरादून – उत्तराखंड के देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र स्थित राजकीय इंटर कॉलेज (राइंका) मेदनीपुर, बद्रीपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। विद्यालय की 12वीं कक्षा के सभी 22 छात्र-छात्राएं फेल हो गए हैं, जबकि इसी विद्यालय की 10वीं कक्षा के 94 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। यह विरोधाभासी परिणाम अब शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर रहा है और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है।
12वीं कक्षा में सभी विद्यार्थी फेल, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
राजकीय इंटर कॉलेज मेदनीपुर, बद्रीपुर की बारहवीं कक्षा में कुल 22 छात्र-छात्राएं थे। उत्तराखंड बोर्ड रिजल्ट 2025 घोषित होते ही यह बात सामने आई कि इनमें से एक भी छात्र पास नहीं हो पाया। जैसे ही यह जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक पहुंची, मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) विनोद कुमार ढौंडियाल ने इसपर गंभीरता दिखाई और जांच के आदेश दे दिए।
दूसरी ओर 10वीं में शानदार प्रदर्शन
इसी विद्यालय की 10वीं कक्षा में कुल 66 छात्र-छात्राएं थे, जिनमें से 62 ने परीक्षा उत्तीर्ण की। यानि यहां का 10वीं का परिणाम लगभग 94% रहा, जो अपने आप में एक सराहनीय उपलब्धि है। ऐसे में 12वीं का 100% फेल होना शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन और विषय चयन की समस्या की ओर इशारा करता है।
केवल विज्ञान संकाय (पीसीएम) उपलब्ध – बना बड़ी समस्या
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि स्कूल में केवल पीसीएम (भौतिक, रसायन, गणित) विषयों की पढ़ाई होती है, और कला या वाणिज्य विषय का कोई विकल्प मौजूद नहीं है। यही कारण है कि कई छात्रों को मजबूरी में विज्ञान संकाय चुनना पड़ा, जबकि उनकी रूचि और क्षमता अन्य विषयों में थी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य और स्टाफ का कहना है कि इन बच्चों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, और वे दूर के किसी दूसरे स्कूल में जाकर अन्य विषय पढ़ने में असमर्थ थे। छात्र संख्या बनी रहे, इसलिए बच्चों को विज्ञान संकाय में ही प्रवेश दिया गया। परिणामस्वरूप, अधिकांश छात्र विषय को समझ नहीं सके और परीक्षा में असफल हो गए।
कला विषय की वर्ष 2016 से हो रही है मांग
विद्यालय प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 2016 से ही कला संकाय शुरू करने की मांग की जा रही है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से आज तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। पूरे ब्लॉक में यह एकमात्र स्कूल है जहां कला विषयों का संचालन नहीं हो रहा है। यदि यहां कला विषय उपलब्ध होता, तो कई छात्र-छात्राएं विज्ञान की जगह अपने रुचि अनुसार विषय चुन पाते और परिणाम भी बेहतर होता।
शिक्षा विभाग का जवाब – जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल ने कहा कि जिन विद्यालयों का परिणाम बेहद खराब रहा है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विद्यालय में केवल विज्ञान संकाय उपलब्ध होने के कारण, कमजोर छात्र भी इसी विषय में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही विद्यालय में कला विषय शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि बच्चों को उनकी क्षमता और रूचि के अनुसार विषय चुनने का विकल्प मिले।
समस्या का समाधान जरूरी, वरना भविष्य में भी दोहराई जाएगी कहानी
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बल्कि प्रदेश के उन तमाम सरकारी स्कूलों की हकीकत है जहां छात्रों को उनकी इच्छा के विपरीत विषय पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इस तरह की व्यवस्था केवल फेल प्रतिशत को ही नहीं बढ़ाती, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास भी तोड़ती है।
निष्कर्ष
राजकीय इंटर कॉलेज मेदनीपुर, बद्रीपुर की 12वीं कक्षा का यह 'शून्य प्रतिशत परिणाम' एक चेतावनी है कि अगर शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो न केवल बच्चों का भविष्य अंधकारमय होगा, बल्कि सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा भी डगमगाने लगेगा। अब समय आ गया है कि शिक्षा विभाग ज़मीनी स्तर पर वास्तविक जरूरतों को समझे और त्वरित निर्णय लेकर विद्यालयों को समग्र रूप से सक्षम बनाए।


Post a Comment