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"15 दिन में हरियाली की पहल: युवा सरपंच अजय कुमार ने लगाए 1000 वृक्ष"

 धारी, नैनीताल (उत्तराखंड)


वन पंचायत मजेला, धारी में बदलाव की बयार बह रही है। यहां के युवा सरपंच अजय कुमार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत एक बेहद सराहनीय पहल से की है। सरपंच बनने के महज 15 दिन बाद ही उन्होंने लगभग 1000 वृक्षों का वृक्षारोपण कर एक मिसाल कायम की।




स्थानीय जनता की सक्रिय भागीदारी
इस वृक्षारोपण अभियान में मजेला के ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने अपने स्तर पर इस मुहिम को सफल बनाने में योगदान दिया। अजय कुमार ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक हरित विरासत छोड़ना है।




अभियान का केंद्र: "शहतूत का पेड़"
इस अभियान में विशेष रूप से हतूत (शहतूत) के पेड़ों का चयन किया गया, जो न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं, बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी पोषण का स्रोत बनते हैं। हतूत के लगभग 1000 पौधे गांव के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए।


सरपंच अजय कुमार का विजन:
"पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिन का काम नहीं है। मेरा सपना है कि माजेला पंचायत आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की सबसे हरी-भरी पंचायतों में गिनी जाए। यह शुरुआत है, और आगे भी ऐसे कई कार्य किए जाएंगे।"


एक नई उम्मीद का संचार
अजय कुमार की इस पहल ने ग्रामीणों में एक नया जोश भर दिया है। जहां आमतौर पर नेता बनने के बाद वादे ही सुनने को मिलते हैं, वहीं अजय कुमार ने काम करके दिखाया है। उनकी सोच और कार्यशैली बताती है कि पंचायत स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।




निष्कर्ष:
माजेला पंचायत का यह वृक्षारोपण अभियान न केवल एक पर्यावरणीय कदम है, बल्कि यह दर्शाता है कि यदि युवा नेतृत्व दृढ़ संकल्प ले ले, तो बदलाव संभव है। अजय कुमार जैसे सरपंच उत्तराखंड की ग्रामीण राजनीति में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं।



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