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अंकिता हत्याकांड अपडेट: वकील नदारद, पुलकित आर्य ने कोर्ट में खुद की बहस की | अगली सुनवाई 2 मई को

कोटद्वार।

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में शनिवार को एक नया मोड़ देखने को मिला। लगातार दूसरी तिथि पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके चलते मुख्य आरोपी पुलकित आर्य को खुद अपनी पैरवी करनी पड़ी। पुलकित ने अदालत में खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया। अब अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 मई की तिथि निर्धारित की है।

गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की एसआईटी जांच के बाद यह मामला कोटद्वार की एडीजे (अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश) कोर्ट में विचाराधीन है। अदालत में अभियोजन पक्ष की बहस पूरी हो चुकी है और अब 19 अप्रैल से बचाव पक्ष की बहस चल रही है। मगर बचाव पक्ष के वकीलों की अनुपस्थिति ने इस बहुप्रतीक्षित ट्रायल में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

शनिवार को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील फिर से अदालत में हाजिर नहीं हुए। ऐसे में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य ने स्वयं अदालत में अपने बचाव में दलीलें पेश कीं। पुलकित ने अदालत को बताया कि उसके ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं और उसे झूठा फंसाया गया है। उसने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले से बरी किए जाने की मांग की।

इससे पहले भी 23 अप्रैल को बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुज पुंडीर ने अदालत को ई-मेल के माध्यम से एक प्रार्थना पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया था। उन्होंने अदालत से सुरक्षा की मांग करते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बहस की अनुमति देने की प्रार्थना की थी। अदालत ने उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बहस की अनुमति प्रदान कर दी थी। बावजूद इसके, वे अदालत की सुनवाई में शामिल नहीं हुए।

बचाव पक्ष के एक अन्य अधिवक्ता अमित सजवाण ने तो पिछली सुनवाई के दौरान अपनी जान को खतरा बताते हुए वकालतनामा वापस ले लिया था। इससे बचाव पक्ष की ओर से पुलकित आर्य का पक्ष रखने के लिए कोई वकील शेष नहीं रह गया, जिस कारण पुलकित को स्वयं बहस करनी पड़ी।

मुकदमे का मौजूदा चरण और आगे की प्रक्रिया

फिलहाल मुकदमा अपने अंतिम चरण में है, जहां बचाव पक्ष की बहस चल रही है। अभियोजन पक्ष ने अपनी बहस के दौरान पुलकित आर्य और अन्य आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत और गवाह प्रस्तुत किए हैं। अब बचाव पक्ष को अपनी दलीलें पेश कर अभियोजन के आरोपों का खंडन करना है। चूंकि वकीलों की अनुपस्थिति में पुलकित स्वयं बहस कर रहा है, यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका ट्रायल पर क्या प्रभाव पड़ता है।

अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 2 मई की तिथि तय कर दी है। अगर उस दिन भी बचाव पक्ष की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं होता और पुलकित खुद अपनी बहस जारी रखता है, तो अदालत आगामी कार्यवाही के लिए जरूरी आदेश पारित कर सकती है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: एक नजर

सितंबर 2022 में ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे उत्तराखंड समेत देशभर में आक्रोश फैला दिया था। जांच में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर और एक अन्य कर्मचारी की संलिप्तता सामने आई थी। इसके बाद पुलकित आर्य को मुख्य आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया गया। इस मामले की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपी गई थी, जिसने विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की थी।

हत्याकांड को लेकर जनता के बीच भारी आक्रोश रहा है और पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने की मांग लगातार उठती रही है। इसी संवेदनशीलता के चलते अदालत भी मामले की सुनवाई में विशेष गंभीरता बरत रही है।

क्या कहता है कानून

भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत यदि कोई आरोपी चाहे तो वह स्वयं भी अदालत में अपनी पैरवी कर सकता है। हालांकि, गंभीर मामलों में आमतौर पर अभियुक्त की ओर से पेशेवर वकील ही बहस करते हैं। मगर इस मामले में वकीलों की अनुपस्थिति और जान का खतरा जताने की परिस्थितियों ने एक असाधारण स्थिति पैदा कर दी है, जिससे पुलकित को स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा।

निष्कर्ष

अंकिता हत्याकांड का मुकदमा निर्णायक मोड़ पर है। अभियोजन पक्ष अपनी पूरी ताकत झोंक चुका है और अब बचाव पक्ष की दलीलों पर निगाहें टिकी हैं। पुलकित आर्य का खुद अपनी पैरवी करना और वकीलों का लगातार अनुपस्थित रहना, दोनों ही घटनाक्रम इस केस को और भी जटिल बना रहे हैं। अब सबकी नजरें 2 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत आगे की कार्यवाही तय करेगी।



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