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राजकीय इंटर कॉलेजों में 692 प्रधानाचार्य पदों पर सीधी भर्ती की तैयारी, नियमावली को अंतिम रूप

देहरादून।

राज्य के राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के रिक्त पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने अहम कदम उठाया है। विभाग ने 50 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने के लिए संशोधित शैक्षिक (अध्यापन संवर्ग) राजपत्रित सेवा नियमावली को अंतिम रूप दे दिया है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन के अनुसार, सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अब इस नियमावली को राज्य कैबिनेट की अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल 1385 प्रधानाचार्य पद हैं, जिनमें से 1180 पद रिक्त पड़े हैं। शिक्षा व्यवस्था की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2022 में यह निर्णय लिया था कि आधे पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इस क्रम में अब 692 पदों को सीधी भर्ती से भरने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

नियमावली में हुआ अहम संशोधन
सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग ने चयन परीक्षा के नियमों में अहम बदलाव करते हुए एलटी कैडर के उन शिक्षकों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है जिन्होंने 15 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। पहले यह पात्रता केवल प्रवक्ता स्तर के शिक्षकों तक सीमित थी, लेकिन अब एलटी शिक्षकों को भी मौका दिया जाएगा। साथ ही, 55 वर्ष तक की आयु के शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, नॉन-बीएड प्रवक्ताओं को भी कुछ शर्तों के साथ छूट देने का प्रस्ताव है।

खाली पदों से बाधित हो रही शिक्षा व्यवस्था
सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य और हेडमास्टर की कमी से शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस स्थिति पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अल्मोड़ा जिले के अनेक विद्यालयों में स्थायी प्रधानाचार्य और हेडमास्टर नहीं हैं, और यह समस्या पूरे राज्य में फैली हुई है। उन्होंने कहा कि केवल एक बार कांग्रेस सरकार के समय बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई थीं, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद पद खाली होते चले गए और अब तक भरे नहीं गए।

चयन परीक्षा रद्द होने से थी नाराजगी
गौरतलब है कि पिछली बार 29 सितंबर 2024 को प्रस्तावित चयन परीक्षा को सरकार ने विरोध के चलते रद्द कर दिया था। शिक्षकों के एक वर्ग ने इस नीति का विरोध किया था, वहीं कुछ शिक्षक चयन परीक्षा के पक्ष में थे। अब संशोधित नियमावली में व्यापक परिवर्तन कर सभी पक्षों को संतुलित करने का प्रयास किया गया है।

प्राथमिकता वाले विद्यालयों में होगी नियुक्ति
शिक्षा विभाग का कहना है कि चयन परीक्षा के माध्यम से नियुक्त होने वाले प्रधानाचार्यों को प्राथमिकता के आधार पर उन विद्यालयों में नियुक्त किया जाएगा, जहां छात्रों की संख्या अधिक है और वर्तमान में प्रधानाचार्य की नियुक्ति नहीं है।


पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों की भारी कमी पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अल्मोड़ा जिले के एक स्कूल में स्थायी हेडमास्टर या प्रधानाचार्य नियुक्त नहीं है, और यही स्थिति पूरे उत्तराखंड में देखने को मिल रही है। रावत ने बताया कि केवल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही अधिकांश हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक नियुक्त किए गए थे, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद ये पद खाली होते चले गए और अब तक भरे नहीं गए हैं।

शिक्षा विभाग की यह पहल लंबे समय से चली आ रही रिक्तियों को भरने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। यदि कैबिनेट से अनुमति मिल जाती है, तो जल्द ही उत्तराखंड के स्कूलों को स्थायी प्रधानाचार्य मिल सकेंगे, जिससे शैक्षिक गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यों में सुधार की उम्मीद है।

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