भरवा पराठा से लेकर वेज बिरयानी तक -1 मई से स्कूलों में नया मिड-डे मील मेन्यू
सोनीपत, हरियाणा
हरियाणा के राजकीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अब मिड-डे मील में मिलेगा और भी स्वादिष्ट व पौष्टिक भोजन। शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र के साथ मिड-डे मील का मेन्यू पूरी तरह बदल दिया है, जो 1 मई से लागू किया जाएगा। इस बार बच्चों की थाली में भरवा पराठा, दही, कढ़ी-पकौड़ा, वेज बिरयानी, पौष्टिक खिचड़ी और दलिया जैसे स्वादिष्ट और सेहतमंद व्यंजन शामिल किए गए हैं।
18 पौष्टिक व्यंजनों की सूची तैयार
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पूर्व में मिड-डे मील योजना) के अंतर्गत इस बार शिक्षा विभाग ने पूरे महीने के लिए 18 अलग-अलग व्यंजनों की सूची तैयार की है। इसका उद्देश्य बच्चों को संतुलित व पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से तंदरुस्त रह सकें। डाइट प्लान के अनुसार अब हर दिन एक नया व्यंजन बच्चों को परोसा जाएगा, जिससे मिड-डे मील की एकरसता भी खत्म होगी और पोषण स्तर भी सुधरेगा।
खास ध्यान पोषण और स्थानीय अनाज पर
इस बार के मेन्यू में खास बात यह है कि इसमें गेहूं और रागी जैसे मोटे अनाज, मौसमी सब्जियां, चने, मूंग-मसूर, सफेद व काले छोले, और गुड़ जैसे पारंपरिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी गई है। इससे न केवल बच्चों को ऊर्जा मिलेगी, बल्कि उनके पोषण स्तर में भी सुधार होगा।
हर हफ्ते अलग स्वाद
हर सप्ताह के दिन के हिसाब से अलग-अलग व्यंजनों को तय किया गया है। जैसे सोमवार को कभी वेज बिरयानी तो कभी सोया खिचड़ी, मंगलवार को मीठी दलिया या घीया-चने की दाल, बुधवार को सफेद छोले-चावल या राजमा-चावल, और शनिवार को भरवा पराठा-दही जैसी थाली बच्चों को मिलेगी।
नियमों की अनदेखी पर होगी सख्त कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी नवीन गुलिया ने स्पष्ट किया है कि मिड-डे मील में निर्धारित मेन्यू के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कहीं पर तय व्यंजनों से इतर भोजन परोसा गया या उसकी गुणवत्ता में कमी पाई गई, तो संबंधित मिड-डे मील प्रभारी पर कार्रवाई की जाएगी।
भोजन की गुणवत्ता की होगी लैब जांच
खास बात यह भी है कि अब हर माह एक बार भोजन की लैब जांच कराई जाएगी। मिड-डे मील प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर महीने किसी एक दिन का भोजन लैब में जांच के लिए भेजें। यदि जांच रिपोर्ट में भोजन में पोषक तत्वों की कमी या गुणवत्ता में गिरावट पाई गई, तो संबंधित प्रभारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
संतुलित आहार से बेहतर होगा स्वास्थ्य
विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों को नियमित रूप से संतुलित और पौष्टिक आहार मिलना बेहद जरूरी है। इससे न केवल उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि उनकी एकाग्रता, सीखने की क्षमता और विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी यह नया मिड-डे मील मेन्यू इसी दिशा में एक सार्थक पहल मानी जा रही है।
समाप्ति में
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मिड-डे मील न सिर्फ एक भोजन योजना है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हरियाणा सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव से बच्चों को स्वाद के साथ-साथ पोषण भी मिलेगा और उनका शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होगा। यदि इसे ईमानदारी से लागू किया गया, तो यह योजना विद्यार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।


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