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उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में बड़ा कदम: सेवा अवधि बनेगी आधार

देहरादून। उत्तराखंड में वर्षों से उपनल के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस प्रक्रिया का पहला चरण शुरू हो चुका है, जिसमें सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी ने सभी विभागों से उपनल कर्मियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है।


इस ब्योरे में विभागों से कर्मियों के नाम, पदनाम, वेतनमान, मानदेय, चयन वर्ष, सेवा अवधि, और आरक्षण की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों और प्रभारी सचिवों को इस संबंध में पत्र जारी किए गए हैं।

21 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी कर रहे सेवा

उत्तराखंड में वर्तमान में 21,599 उपनल कर्मचारी विभिन्न विभागों में आउटसोर्स के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से 10,911 कर्मियों को नौकरी करते हुए पांच साल से अधिक का समय हो चुका है, जबकि 6,944 कर्मी दस साल से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी स्थिति अभी तक अस्थायी बनी हुई है।


पूर्व सैनिक और उनके आश्रितों को प्राथमिकता

उपनल का उद्देश्य पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को रोजगार देना था। 21,599 उपनल कर्मियों में से 4402 पूर्व सैनिक हैं, जबकि 4080 कर्मचारी पूर्व सैनिकों के आश्रित हैं। बाकी 13,117 कर्मचारी गैर सैन्य पृष्ठभूमि से हैं। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन्हीं कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए एक संतुलित और न्यायसंगत नीति तैयार करना है।

सेवा अवधि बनेगी नियमितीकरण का आधार

सूत्रों के अनुसार, सरकार उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए जो नीति बना रही है, उसमें सेवा अवधि को मुख्य मानक बनाया जाएगा। अभी तक की चर्चाओं के अनुसार, तदर्थ और संविदा कर्मियों के लिए कम से कम दस वर्ष की सेवा अवधि को नियमितीकरण के लिए न्यूनतम पात्रता माना जा रहा है। ऐसे में यह संभावना है कि उपनल कर्मचारियों के लिए भी इसी तरह की चरणबद्ध नीति बनाई जाए, जिसमें पहले लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को शामिल किया जाए।

नीति निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही उपनल कर्मियों के नियमितीकरण को लेकर नीति बनाने की घोषणा कर चुके हैं। अब यह जिम्मेदारी अधिकारियों की है कि वे जल्द से जल्द इस पर कार्यवाही कर नीति का खाका तैयार करें और सरकार को सौंपें।


उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा,

"मुख्यमंत्री ने उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के लिए ठोस नीति बनाने की घोषणा की है। अब अधिकारियों को चाहिए कि जल्द से जल्द नीति को बनाकर सरकार को सौंपें, जिससे नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो सके।"

सकारात्मक संकेत, लेकिन राह अब भी लंबी

सरकार द्वारा इस दिशा में कदम बढ़ाना निश्चित रूप से सकारात्मक है। वर्षों से उपनल के तहत सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के लिए यह उम्मीद की किरण है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि नीति कब तक तैयार होती है और किन-किन वर्गों को इसका लाभ मिलता है। सबसे जरूरी है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बरकरार रखा जाए।


निष्कर्ष:
उपनल के जरिए काम कर रहे हजारों कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है। सेवा अवधि को आधार बनाकर बनाई जाने वाली नीति निश्चित रूप से न्यायसंगत मानी जा सकती है, लेकिन इसमें यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के साथ-साथ गैर-सैन्य पृष्ठभूमि के कर्मियों को भी बराबरी का मौका मिले। यदि सरकार समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से इस नीति को लागू करती है, तो यह उत्तराखंड में रोजगार के क्षेत्र में एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है।

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