जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई, उधमपुर में एक जवान शहीद
जम्मू-कश्मीर,
जम्मू-कश्मीर एक बार फिर आतंकवाद की आग में झुलस उठा है। ताजा घटनाक्रम में उधमपुर जिले के डुडु-बसंतगढ़ क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना का एक जवान शहीद हो गया। सुरक्षाबलों को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर मंगलवार को संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान छिपे हुए आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया, लेकिन इस संघर्ष में एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया।
यह मुठभेड़ ऐसे समय पर हुई जब घाटी पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले से उबरने की कोशिश कर रही है। सोमवार को अनंतनाग जिले की बायसरन घाटी में पर्यटकों पर हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकियों ने सेना की वर्दी पहनकर पहले पर्यटकों की धार्मिक पहचान पूछी और फिर विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध गोलीबारी की। इस निर्मम हमले में 26 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो विदेशी नागरिक और दो स्थानीय निवासी भी शामिल थे। वहीं, 14 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने ली है, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद सबसे बड़ा हमला है। पुलवामा हमले में 47 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे और उसने देश की सुरक्षा नीति में बड़ा परिवर्तन लाया था।
हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान छेड़ दिया है। पहलगाम के बायसरन घाटी में विशेष तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, वहीं पुंछ के लसाना वन क्षेत्र में भी सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) द्वारा सघन जांच की जा रही है। देर रात कई संदिग्धों को हिरासत में भी लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
तीन जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा से ठीक पहले हुए इस हमले ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा में भाग लेते हैं और इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद रखने के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं। लेकिन आतंकियों के इस कायराना हमले ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या इस बार की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
उधमपुर में शहीद हुए जवान की शहादत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारे सुरक्षा बल किसी भी हाल में देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं हटते। सरकार और सेना के उच्च अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।
सुरक्षा एजेंसियां अब आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के मूड में हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर बढ़ती आतंकी गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि सीमापार से आतंकी संगठनों को समर्थन अब भी जारी है। यह घटना न केवल क्षेत्र की शांति के लिए खतरा है बल्कि देश की अखंडता और सौहार्द को भी चुनौती देती है। अब जरूरत है एक समन्वित और ठोस नीति की, जो आतंकवाद को जड़ से खत्म कर सके और आम नागरिकों को सुरक्षित भविष्य दे सके।
निष्कर्षतः, उधमपुर की मुठभेड़ और पहलगाम का हमला देश के सामने दोहरी चुनौती पेश कर रहे हैं – आतंकी ताकतों से निपटना और आम जनमानस का विश्वास बनाए रखना। सुरक्षा बलों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा, लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को और अधिक गंभीरता से ठोस कदम उठाने होंगे।


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