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2,000 रुपये रिश्वत लेते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती रंगे हाथों गिरफ्तार

हल्द्वानी, 6 मई 2025:

उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की योजना “नंदा गौरा योजना” के अंतर्गत लाभार्थी से 2,000 रुपये रिश्वत लेने के मामले में सतर्कता अधिष्ठान की टीम ने मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ती को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई आम जनता में विश्वास और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है।

गिरफ्तार की गई मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ती की पहचान कमलेश के रूप में हुई है, जो कि हल्द्वानी के वार्ड नंबर-4 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की प्रभारी हैं। कमलेश पर आरोप है कि उन्होंने “नंदा गौरा योजना” के लाभार्थी की बहन से योजना के कागजातों पर दस्तखत करने के एवज में 2,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

क्या है “नंदा गौरा योजना”?
“नंदा गौरा योजना” उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य की बेटियों को शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली योग्य छात्राओं को 40,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।

शिकायत के बाद हरकत में आई सतर्कता टीम
शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिष्ठान के टोल फ्री नंबर 1064 पर फोन कर बताया कि उसकी बहन, जिसने हाल ही में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, सितारगंज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है, “नंदा गौरा योजना” के अंतर्गत आवेदन कर चुकी है। लेकिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए स्कूल की प्रधानाचार्य 10,000 रुपये और आंगनबाड़ी कार्यकर्ती कमलेश 10 रुपये की रिश्वत की मांग कर रही हैं।

जांच के दौरान पता चला कि योजना की सहायता राशि पहले ही 28 मार्च 2025 को लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर हो चुकी थी। इसके बावजूद मुख्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ती कमलेश लगातार 2,000 रुपये की रिश्वत के लिए शिकायतकर्ता पर दबाव बना रही थी। आरोपी ने धमकी भी दी कि यदि पैसे नहीं दिए गए, तो आगे किसी योजना का लाभ नहीं मिलेगा और पूर्व में मिली राशि की जांच करवा कर उसे निरस्त करा दिया जाएगा।

रंगे हाथों पकड़ी गई कमलेश
शिकायत की पुष्टि के बाद पुलिस उपाधीक्षक श्री अनिल सिंह मनराल के पर्यवेक्षण में एक विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। सोमवार को टीम ने योजनाबद्ध तरीके से आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। कमलेश को उसके घर के बाहर उस समय पकड़ा गया जब वह शिकायतकर्ता से 2,000 रुपये की नकद राशि ले रही थी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
कमलेश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या इसमें कोई और कर्मचारी या अधिकारी शामिल है।

जनता से अपील और ट्रैप टीम को पुरस्कार
सतर्कता अधिष्ठान के निदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन ने इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताते हुए ट्रैप टीम को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाएं और किसी भी प्रकार की अवैध मांग या रिश्वतखोरी की जानकारी सतर्कता विभाग के टोल फ्री नंबर 1064 या व्हाट्सएप नंबर 9456592300 पर साझा करें।


यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनता की सजगता और सतर्कता विभाग की तत्परता से बड़ी से बड़ी अनियमितताओं को उजागर किया जा सकता है। यदि आम नागरिक इसी तरह से जागरूक रहें और गलत के खिलाफ आवाज उठाएं, तो एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन का सपना साकार किया जा सकता है।


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