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धामी सरकार का बड़ा एक्शन: हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में 4 अधिकारी निलंबित, कई पर गिरी गाज

द कुमाऊं कनेक्शन, देहरादून 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत राज्य सरकार ने एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय स्थित भूमि की खरीद-फरोख्त में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद, सरकार ने जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह कार्रवाई नगर निगम हरिद्वार के भीतर हुए एक बड़े भूमि क्रय घोटाले को लेकर की गई है, जिसमें संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने इस प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए गन्ना एवं चीनी विभाग के सचिव रणवीर सिंह चौहान को जांच अधिकारी नामित किया था।

क्या है पूरा मामला?
नगर निगम हरिद्वार द्वारा सराय क्षेत्र में स्थित एक भूमि को खरीदे जाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। भूमि खरीद से संबंधित समिति में शामिल अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का सम्यक पालन नहीं किया गया। जांच में यह सामने आया कि भूमि की कीमत, भू-स्वामित्व और वैधता की ठीक से जांच नहीं की गई। इसके साथ ही समिति द्वारा पारदर्शिता के सिद्धांतों की अनदेखी की गई।

इन अधिकारियों पर हुई सख्त कार्रवाई
जांच के बाद जिन अधिकारियों को दोषी पाया गया और निलंबन की कार्रवाई की गई, वे इस प्रकार हैं:

  1. रवीन्द्र कुमार दयाल – अधिशासी अधिकारी श्रेणी-2, प्रभारी सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम, हरिद्वार

  2. आनन्द सिंह मिश्रवाण – सहायक अभियंता, प्रभारी अधिशासी अभियंता, नगर निगम, हरिद्वार

  3. लक्ष्मीकांत भट्ट – कर एवं राजस्व अधीक्षक, नगर निगम, हरिद्वार

  4. दिनेश चन्द्र काण्डपाल – अवर अभियंता, नगर निगम, हरिद्वार

इन सभी अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने भूमि खरीद प्रक्रिया में अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया और नियमों की अनदेखी की।

अन्य जिम्मेदारों पर भी गिरी गाज
इस मामले में सेवा विस्तार पर कार्यरत वेदपाल, सेवानिवृत्त संपत्ति लिपिक की भी संलिप्तता पाई गई। सरकार ने उनके सेवा विस्तार को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इसके अतिरिक्त, निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम, हरिद्वार से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। उनकी भूमिका को लेकर जांच अधिकारी द्वारा कुछ सवाल उठाए गए हैं, जिन्हें लेकर सरकार ने जवाब मांगा है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सख्ती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के अंतर्गत नगर निगम हरिद्वार के इस भूमि घोटाले में तुरंत जांच कर कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेताया है कि वे अपने कार्यों में पारदर्शिता, जिम्मेदारी और ईमानदारी बनाए रखें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों और आमजन में भी इस बात की सराहना हो रही है कि सरकार अनियमितताओं के विरुद्ध सख्त रुख अपना रही है। हरिद्वार जैसे धार्मिक और संवेदनशील क्षेत्र में हुए इस प्रकार के आर्थिक कदाचार को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन अब जाकर शासन स्तर पर कड़ा कदम उठाया गया है।

भविष्य की कार्रवाई के संकेत
शासन स्तर पर संकेत दिए गए हैं कि इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और यदि किसी और की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी वैसी ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम सरकारी निकायों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक सख्त संदेश माना जा रहा है।



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