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शिक्षा विभाग की अनोखी पहल:एक-एक स्कूल को गोद लेंगे अधिकारी

द कुमाऊं कनेक्शन, रुद्रपुर।

जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक के शिक्षा अधिकारी अपने-अपने स्तर पर एक-एक विद्यालय को गोद लेंगे। इन विद्यालयों को ‘आदर्श विद्यालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ आधारभूत संरचना भी सुदृढ़ होगी।

शिक्षा विभाग की यह नई योजना ना केवल शैक्षणिक माहौल को सुधारने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों की छवि और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। वर्तमान में कई सरकारी विद्यालय ऐसे हैं जहां भवन निर्माण, मरम्मत, स्मार्ट क्लास, लैब, पुस्तकालय, खेल सामग्री और योग्य शिक्षकों की कमी महसूस की जाती है। यही कारण है कि विभाग ने यह ठोस कदम उठाया है ताकि एक मॉडल के रूप में विकसित विद्यालय अन्य स्कूलों के लिए उदाहरण बनें।

इस योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) और जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अपने स्तर पर एक-एक विद्यालय को गोद लेंगे। वहीं ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और उप शिक्षा अधिकारी अपने-अपने ब्लॉक के किसी एक विद्यालय को चयनित कर उसे गोद लेंगे। इन स्कूलों को सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त किया जाएगा।

इस प्रक्रिया में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत मिलने वाली निधियों का उपयोग भवन निर्माण, प्रयोगशाला, स्मार्ट क्लास, फर्नीचर और अन्य शैक्षणिक उपकरणों की व्यवस्था में किया जाएगा। साथ ही जिला योजना और शिक्षा विभाग की योजनाओं से मिलने वाली निधि का भी बेहतर समन्वय किया जाएगा, जिससे विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कही यह बात
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक ऐसा विद्यालय हो, जो अपने आप में एक उदाहरण हो। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी खुद किसी विद्यालय को गोद लेंगे तो न केवल निगरानी बढ़ेगी, बल्कि वहां के छात्रों और शिक्षकों का मनोबल भी बढ़ेगा।

स्थानीय सहभागिता को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना से न केवल अधिकारी बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायतें और सामाजिक संस्थाएं भी प्रेरित होंगी। विद्यालयों के कायाकल्प में जनसहयोग की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। कई सीएसआर कंपनियां पहले से ही विद्यालयों के विकास में रुचि ले रही हैं और अब यह प्रक्रिया और संगठित रूप में आगे बढ़ेगी।

एक नई शुरुआत की ओर कदम
शिक्षा विभाग की यह योजना शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत मानी जा रही है। यदि इसे पूरी प्रतिबद्धता और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया, तो आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों की छवि में एक बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। यह पहल सरकारी शिक्षा को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।

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