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उत्तराखंड पंचायत चुनाव की घोषणा जल्द: जानें पूरी खबर

देहरादून, राज्य ब्यूरो: उत्तराखंड के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संभावना है कि अगले माह के अंत तक राज्य में पंचायत चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक अधिसूचना इसी माह जारी की जा सकती है। शासन की ओर से इस दिशा में युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है, वहीं पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन अध्यादेश को राज्यपाल की स्वीकृति की प्रतीक्षा है, ताकि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तय कर आगे की प्रक्रिया को बढ़ाया जा सके।

गौरतलब है कि राज्य गठन के समय से ही हरिद्वार जिले में पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश के साथ होते आ रहे हैं और यह परंपरा आज भी कायम है। हरिद्वार को छोड़ राज्य के शेष 12 जिलों में पिछले पंचायत चुनाव 2019 में कराए गए थे, जिनका कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2024 में समाप्त हो गया। चूंकि तय समय में चुनाव कराए नहीं जा सके, इसलिए पंचायतों को प्रशासकों के हवाले कर दिया गया। हालांकि बाद में संबंधित ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासनिक कार्यभार सौंप दिया गया।

प्रशासकों का कार्यकाल अंतिम चरण में, चुनाव अब अनिवार्य

पंचायतीराज अधिनियम के अनुसार, किसी भी पंचायत में प्रशासक का कार्यकाल अधिकतम छह माह ही हो सकता है। यह अवधि इस माह के अंत तक समाप्त हो रही है, जिससे अब चुनाव कराना अनिवार्य हो गया है। इसी कारण शासन ने पूरी तैयारी कर ली है। परिसीमन की प्रक्रिया, वार्डों का निर्धारण और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।

अब एकमात्र शेष विषय ओबीसी आरक्षण निर्धारण का है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप किया जाना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ओबीसी आरक्षण तभी मान्य होगा, जब उसके लिए एक समर्पित आयोग का गठन कर वैज्ञानिक ढंग से सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ेपन का आंकलन किया जाए। इसी के तहत राज्य सरकार ने एक समर्पित आयोग का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।

अधिनियम संशोधन के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पंचायतों में ओबीसी आरक्षण निर्धारण हेतु पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन आवश्यक है। इसके लिए शासन ने अध्यादेश का मसौदा तैयार कर राजभवन को भेज दिया है। अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही आरक्षण तय कर इसकी सूचना राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। इसके पश्चात आयोग पंचायत चुनाव की तिथि घोषित करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।

पंचायतीराज सचिव ने दी जानकारी

पंचायतीराज सचिव चंद्रेश कुमार ने बताया कि पंचायतीराज अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश की स्वीकृति मिलते ही पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तय कर लिया जाएगा। इस बारे में राज्य निर्वाचन आयोग को भी सूचित किया जाएगा, ताकि चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

चुनाव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी हलचल

पंचायत चुनाव की संभावनाओं के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में हलचल बढ़ गई है। संभावित प्रत्याशी अभी से जनसंपर्क में जुट गए हैं। कई गांवों में भावी उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। वहीं, आरक्षण की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण कुछ स्थानों पर असमंजस भी बना हुआ है। उम्मीदवारों को उम्मीद है कि आरक्षण की स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी, जिससे वे औपचारिक रूप से अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे सकें।


उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की तस्वीर अब धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है। परिसीमन और बाकी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब केवल ओबीसी आरक्षण निर्धारण बाकी है, जो अध्यादेश के माध्यम से संभव होगा। यदि यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, तो राज्य में जून के अंत तक पंचायत चुनाव कराए जाने की पूरी संभावना है। ऐसे में सभी की निगाहें अब राजभवन की मंजूरी पर टिकी हैं, जो पूरे चुनावी कार्यक्रम की दिशा तय करेगी।

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