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कम तनख्वाह और देर से वेतन—उत्तराखंड के व्यावसायिक शिक्षक कर रहे हैं संघर्ष

उत्तराखंड के 531 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा योजना के तहत कार्यरत सैकड़ों व्यावसायिक शिक्षक बीते कई महीनों से वेतन संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ये शिक्षक विज़न इंडिया सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (VISPL) के माध्यम से आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत हैं, लेकिन हर माह उनका वेतन निर्धारित समय पर नहीं मिलता।

शिक्षकों का कहना है कि उनका वेतन अक्सर महीने की 12 तारीख के बाद आता है, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। अप्रैल महीने का वेतन 17 मई तक भी नहीं मिल पाया है, जिससे उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं।

एक शिक्षक ने बताया, "हमारी सैलरी पहले ही बहुत कम है, ऊपर से समय पर न मिलना हमारे लिए दोहरी मुसीबत है। किराया, बच्चों की फीस, घरेलू खर्च सब प्रभावित हो रहे हैं।"

जब इस संबंध में कंपनी VISPL से संपर्क किया गया तो उन्होंने देरी के पीछे विभागीय प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि यह समस्या बार-बार हो रही है और इसके स्थायी समाधान की जरूरत है।

अब व्यावसायिक शिक्षकों ने सरकार और VISPL दोनों से मांग की है कि वेतन समय पर दिया जाए ताकि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित रहकर शिक्षा व्यवस्था में अपना योगदान दे सकें।

(कुमाऊं कनेक्शन/उत्तराखंड ब्यूरो)

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