उत्तराखण्ड में वाहनों के पंजीयन कोड अब "UK" नहीं, अब "उ०ख०" जाने पूरी खबर...
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार ने राजभाषा हिन्दी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अब परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के पंजीयन कोड अंग्रेज़ी के साथ-साथ हिन्दी में भी अंकित किए जाएंगे। इसके तहत अब तक "UK" (यू०के०) के रूप में दर्ज पंजीयन कोड को हिन्दी में "उ०ख०" के रूप में लिखा जाएगा। यह निर्णय भाषा विभाग, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा लिया गया है, जिसे मा० मंत्री, भाषा विभाग की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
उत्तराखण्ड राजभाषा अधिनियम, 2009 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों में सभी शासकीय कार्यों में हिन्दी भाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित किया गया है। इसी कड़ी में यह नवीन पहल की गई है, जिससे न केवल हिन्दी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय पहचान भी और अधिक मजबूत होगी।
हिन्दी को मिलेगा संस्थागत दर्जा
वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य के सम्भागीय व उप-सम्भागीय परिवहन कार्यालयों को वाहनों के पंजीयन कोड केवल अंग्रेज़ी में "UK" के रूप में आबंटित किए जाते हैं। लेकिन अब इसके साथ-साथ हिन्दी में "उ०ख०" भी प्रयोग में लाया जाएगा। इससे राजभाषा अधिनियम को मूर्त रूप देने के साथ ही राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई अस्मिता को मजबूती मिलेगी।
अन्य राज्यों में पहले से है यह व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड से पहले उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में पहले से ही वाहनों के पंजीयन को हिन्दी भाषा में भी अंकित किया जा रहा है। इन राज्यों ने राजभाषा को प्राथमिकता देते हुए सरकारी दस्तावेज़ों व प्रतीकों में हिन्दी को प्रमुख स्थान दिया है। उत्तराखण्ड भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
प्रस्ताव को मिली मंत्री की स्वीकृति
इस सम्बन्ध में तैयार किए गए प्रस्ताव को मा० मंत्री, भाषा विभाग, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा स्वीकृति दे दी गई है। प्रमुख निजी सचिव आर.एस. राणा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र के अनुसार अब परिवहन विभाग इस निर्णय को लागू करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करेगा। माना जा रहा है कि भविष्य में जो भी वाहन पंजीकृत होंगे, उनमें हिन्दी कोड "उ०ख०" भी अंकित रहेगा।
हिन्दी को तकनीकी क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में पहल
यह निर्णय केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि तकनीकी क्षेत्रों में हिन्दी भाषा के समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। अब तक सरकारी तंत्र और तकनीकी दस्तावेज़ों में हिन्दी का प्रयोग सीमित रहा है, लेकिन इस प्रकार के निर्णय आने वाले समय में इसे व्यापक बनाएंगे।
भविष्य में हो सकता है और विस्तार
राज्य सरकार के इस निर्णय से उत्साहित भाषा प्रेमियों और नागरिक संगठनों को उम्मीद है कि भविष्य में अन्य सरकारी सेवाओं—जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, चालान आदि में भी हिन्दी को और अधिक व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भी हिन्दी को प्राथमिकता मिलेगी।
निष्कर्ष
उत्तराखण्ड सरकार की यह पहल राजभाषा हिन्दी को सम्मान देने और उसे व्यवहारिक जीवन में उतारने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में स्थानीय भाषा की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों में भाषा के प्रति जागरूकता और अपनत्व की भावना भी सुदृढ़ होगी। यह निर्णय आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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