मंच पर मंत्री से बहस करना पड़ा महंगा, शिक्षक को विभाग ने थमाया कारण बताओ नोटिस
देहरादून,
चमोली जनपद के एक राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम के दौरान एक शिक्षक द्वारा शिक्षा मंत्री से मंच पर चढ़कर बहस करना अब उनके लिए मुसीबत का कारण बन गया है। सहायक अध्यापक ललित मोहन सती ने स्कूलों में शिक्षकों की पदोन्नति और प्रधानाचार्यों की कमी को लेकर मंच पर जाकर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन यह तरीका विभाग को नागवार गुज़रा। अब उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह पूरा मामला 17 मई को चमोली जिले के विकासखंड दशोली स्थित पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेज, ग्वाड़ देवलधार में हुए वार्षिकोत्सव समारोह से जुड़ा है। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत पहुंचे थे। मंत्री जैसे ही मंच से छात्र-छात्राओं को संबोधित करने उठे, तभी विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक (एलटी) ललित मोहन सती अचानक मंच पर पहुंच गए और विभागीय अनियमितताओं को लेकर बहस करने लगे।
शिक्षक ने मंच से ही शिक्षा मंत्री से पूछा कि जब वर्षों से पदोन्नति नहीं हो रही, स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं हैं और शिक्षकों की भारी कमी है, तो पढ़ाई कैसे होगी? उन्होंने कहा कि वे केवल शिक्षक नहीं, बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित एक नागरिक भी हैं।
शिक्षक की इस अप्रत्याशित कार्रवाई से मंच पर उपस्थित जनप्रतिनिधि और अधिकारी असहज हो गए। जनपद के तीनों विधायक भी कार्यक्रम में मौजूद थे और वे भी शिक्षक की इस सार्वजनिक प्रतिक्रिया से अचंभित रह गए। हालांकि, शिक्षा मंत्री डॉ. रावत ने स्थिति को संभालते हुए शिक्षक को शांत कराया और मंच से नीचे भेजा। इसके बाद मंत्री ने अपना संबोधन जारी रखा।
मामला यहीं नहीं रुका। मंच पर हुई इस बहस का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल कंचन देवराड़ी ने शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में दो दिन के भीतर जवाब मांगा गया है कि उन्होंने इस प्रकार का अनुशासनहीन कृत्य क्यों किया।
शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने क्या कहा?
इस पूरे घटनाक्रम पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने कहा कि, “शिक्षक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी बात को कहने की एक मर्यादा और उपयुक्त मंच होता है। यदि किसी शिक्षक को कोई शिकायत है, तो उसे माध्यमिक शिक्षा निदेशालय या नियमानुसार उचित माध्यमों से रखा जाना चाहिए। मंच पर इस प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”
विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर शिक्षक का जवाब प्राप्त नहीं होता, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्हें कुछ कहना नहीं है और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि शिक्षक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं थे, इसके बावजूद मंच पर पहुंचकर उन्होंने शासकीय गरिमा का उल्लंघन किया है।
शिक्षकों की समस्याएं बनीं जमीनी हकीकत
यह मामला भले ही अनुशासनहीनता के दायरे में आ रहा हो, लेकिन इससे राज्य के शिक्षकों की वर्षों पुरानी पीड़ा एक बार फिर सामने आ गई है। लंबे समय से शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई है, स्कूलों में प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य के पद खाली पड़े हैं, जिससे शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
निष्कर्ष
शिक्षक ललित मोहन सती का मंच पर चढ़कर मंत्री से बहस करना भले ही विभागीय नियमों के तहत अनुशासनहीनता माना जा रहा हो, लेकिन इससे यह भी साफ है कि शिक्षक समुदाय में असंतोष और हताशा लगातार बढ़ रही है। अब देखना यह होगा कि शिक्षक के जवाब के बाद विभाग क्या कार्रवाई करता है और क्या इससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर कोई ठोस निर्णय निकलता है या नहीं।


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