उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए प्रशासकों की नई नियुक्ति, 31 जुलाई 2025 तक चलेगा कार्यकाल
देहरादून, 9 जून 2025 — उत्तराखंड सरकार ने राज्य की त्रिस्तरीय पंचायतों (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) के सुचारू संचालन के लिए एक अहम निर्णय लेते हुए प्रशासकों की पुनः नियुक्ति की है। पंचायतों के पूर्व प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने और आगामी पंचायत चुनाव जुलाई 2025 तक प्रस्तावित होने के चलते यह फैसला लिया गया है। इस संबंध में पंचायतीराज अनुभाग-1 द्वारा अधिसूचना संख्या 30500/XII(1)/2025/86(15)2013/ई-68985 दिनांक 09 जून 2025 को जारी की गई है।
त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल समाप्त
गौरतलब है कि प्रदेश की वर्तमान त्रिस्तरीय पंचायतें वर्ष 2019 में गठित की गई थीं, जिनका निर्धारित कार्यकाल हाल ही में समाप्त हो चुका है। पंचायत चुनावों की प्रक्रिया शुरू न हो पाने की स्थिति में शासन ने पूर्व में जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से जिलाधिकारियों को प्रशासकों के रूप में अधिकृत किया था। ये प्रशासक ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत स्तर पर कार्यरत रहे।
शासन की अधिसूचना के अनुसार:
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ग्राम पंचायतों के प्रशासकों का कार्यकाल 27 मई 2025 को,
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क्षेत्र पंचायतों का 29 मई 2025 को,
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और जिला पंचायतों का कार्यकाल 01 जून 2025 को समाप्त हो गया।
चुनाव न हो पाने के पीछे अपरिहार्य परिस्थितियां
त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए चुनाव निर्धारित समय से पहले कराए जाना संभव नहीं हो पाया, जिसका कारण शासन द्वारा “अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियां” बताया गया है। हालांकि अधिसूचना में उन कारणों का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन यह संकेत अवश्य है कि चुनावी तैयारियां समय से पूरी नहीं हो सकीं।
नई प्रशासक व्यवस्था 31 जुलाई 2025 तक
राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि पंचायतों के संचालन में कोई रुकावट न आए, इसके लिए नई प्रशासक व्यवस्था लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आगामी पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पूर्ण होने या 31 जुलाई 2025 (जो भी पहले हो) तक लागू रहेगी।
नई व्यवस्था के अंतर्गत:
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जिला पंचायतों में – संबंधित जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट को प्रशासक नियुक्त किया गया है।
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क्षेत्र पंचायतों में – संबंधित उपजिलाधिकारी (SDM) को उनकी क्षेत्राधिकारिता में प्रशासक नियुक्त किया गया है।
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ग्राम पंचायतों में – संबंधित विकासखंड में कार्यरत सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पूर्व की अधिसूचनाएं रहेंगी प्रभावी
यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में प्रशासकों की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचनाओं में उल्लिखित सभी शर्तें यथावत लागू रहेंगी। इसका अर्थ है कि प्रशासनिक दायित्व, अधिकार व सीमाएं पूर्ववत बनी रहेंगी, केवल व्यक्तियों का परिवर्तन किया गया है।
प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश
यह निर्णय इस दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है कि प्रदेश में पंचायतों के माध्यम से संचालित होने वाली विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं व विकास कार्य बाधित न हों। ग्राम पंचायतें स्थानीय स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन की रीढ़ होती हैं। ऐसे में शासन का यह कदम पंचायत प्रशासन में निरंतरता बनाए रखने की दिशा में प्रभावी माना जा रहा है।
जनहित में लिया गया निर्णय
शासन ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय कार्यहित, जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन को दृष्टिगत रखते हुए लिया गया है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि जैसे ही पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पूर्ण होती है, नई पंचायतों को कार्यभार सौंप दिया जाएगा।
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए भले ही अभी कुछ समय बाकी हो, लेकिन शासन ने स्थिति को संवेदनशील मानते हुए कार्यपालिका में किसी भी प्रकार की शून्यता से बचने के लिए त्वरित निर्णय लिया है। नई प्रशासक व्यवस्था से पंचायत स्तर पर विकास और जनसेवा कार्यों में निरंतरता बनी रहने की संभावना है।

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