Super money

बड़ी खबर: कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को भी मिड डे मील!

देहरादून।

उत्तराखंड सरकार अब माध्यमिक शिक्षा स्तर के विद्यार्थियों के लिए भी मिड डे मील योजना लागू करने की तैयारी में है। अभी तक यह योजना केवल पहली से आठवीं कक्षा तक सीमित थी, लेकिन अब शिक्षा विभाग ने नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों को भी इसका लाभ देने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच चर्चा भी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने इस पर विस्तृत योजना बनाकर प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि जल्द से जल्द इसे धरातल पर उतारा जा सके।

क्यों जरूरी है माध्यमिक छात्रों को मिड डे मील?

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था (13 से 18 वर्ष) बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान उन्हें पर्याप्त मात्रा में पोषण की आवश्यकता होती है। वर्तमान में राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पीएम पोषण योजना (पूर्व में मिड डे मील योजना) के तहत गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है। लेकिन नौवीं से ऊपर के छात्रों को इस योजना से बाहर रखा गया है।

उत्तराखंड के भौगोलिक परिदृश्य को देखते हुए – जहां कई छात्र दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों से आते हैं – ऐसे में उन्हें स्कूल में पोषक भोजन मिलना न केवल उनकी सेहत के लिए बल्कि उनकी पढ़ाई में भी मददगार होगा। इससे न केवल छात्रों की उपस्थिति बढ़ेगी बल्कि ड्रॉपआउट रेट को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।

प्रस्ताव के मुख्य बिंदु

शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार, यदि यह योजना लागू होती है तो इसका लाभ राज्य के 2,295 सरकारी और 331 अशासकीय माध्यमिक स्कूलों के करीब 2,57,362 छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इसके अतिरिक्त, भोजन तैयार करने के लिए 5,592 नई भोजन माताओं की नियुक्ति की जाएगी, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इस योजना पर राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 119.81 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। यह राशि राज्य के बजट और वित्तीय स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। हालांकि यह योजना फिलहाल केंद्र सरकार की पीएम पोषण योजना का हिस्सा नहीं है, लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि इसे राज्य के संसाधनों से ही संचालित किया जा सकता है।

शिक्षा मंत्री का बयान

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि “राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक छात्र तक गुणवत्ता युक्त शिक्षा के साथ-साथ पौष्टिक भोजन पहुंचाना है। नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों के लिए मिड डे मील योजना लागू करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इस प्रस्ताव में रुचि दिखा रहे हैं और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

भविष्य के लिए बड़ा निवेश

इस प्रस्ताव को केवल एक योजना न मानकर, राज्य के भविष्य में निवेश के रूप में देखा जा रहा है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। यदि किशोर छात्रों को स्कूल में ही पोषक भोजन मिलने लगे तो वे शारीरिक और मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत होंगे और पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।


उत्तराखंड सरकार का यह कदम यदि सफलतापूर्वक लागू हो जाता है तो यह देश में अपनी तरह की एक अनूठी पहल होगी। जहां अभी तक केंद्र सरकार की पीएम पोषण योजना केवल कक्षा 8 तक सीमित है, वहीं उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा स्तर तक इसे विस्तारित कर उदाहरण पेश कर सकता है। इसके माध्यम से न केवल छात्रों को पोषण मिलेगा, बल्कि रोजगार भी सृजित होंगे और राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार होगा।

यदि यह योजना लागू होती है तो यह न केवल एक जनकल्याणकारी पहल होगी बल्कि उत्तराखंड को शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में एक नया आयाम देगी।

कोई टिप्पणी नहीं

merrymoonmary के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.