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नैनीताल का अघरिया गांव सड़क के लिए तरसता रहा, नेता करते रहे वादे

(रिपोर्ट: कुमाऊं कनेक्शन)

नैनीताल जनपद के कई क्षेत्रों में भले ही विकास की रफ्तार की बातें होती हों, लेकिन आज भी कुछ गांव ऐसे हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ऐसा ही एक गांव है – अघरिया (रौलजांगल, चीनिया), जहां आज़ादी के 75 साल बाद भी सरकारी सड़क नहीं पहुंची। यहां के ग्रामीण आज भी आवाजाही के लिए खुद की बनाई कच्ची पगडंडियों और अस्थायी रास्तों पर निर्भर हैं।

खुद बनाई सड़क, लेकिन बारिश बनती है बाधा

ग्रामीणों ने कई वर्षों तक इंतजार करने के बाद अपने संसाधनों से कच्चा रास्ता तैयार किया ताकि गांव से बाहर आ-जा सकें, बच्चों को स्कूल भेज सकें और अपनी खेती की उपज बाजार तक पहुंचा सकें। परंतु यह कच्ची सड़क हर बरसात में कीचड़ में तब्दील हो जाती है। कई बार यह रास्ता पानी के बहाव से बह भी जाता है, जिससे गांव पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है, बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाना चुनौती बन जाता है और सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि खेती की उपज मंडी तक नहीं पहुंच पाती

फसलें समय पर नहीं पहुंचने से होती हैं खराब

अघरिया (रौलजांगल, चीनिया) गांव के अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। गांव में आलू, टमाटर, मटर, मिर्च, गोभी जैसी फसलें व फल उगाएं जाते हैं। परंतु हर साल जब फसल तैयार होती है, उसी दौरान बारिश शुरू हो जाती है और रास्ता आवागमन के लायक नहीं रहता

इस कारण से किसान अपनी उपज समय पर मंडी या बाजार तक नहीं पहुंचा पाते, जिससे फसल या तो खेत में सड़ जाती है या फिर कम दामों पर आसपास ही बेचनी पड़ती है। इससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान होता है।

“नेताओं ने किया वादा, लेकिन निभाया नहीं”

गांव के बुजुर्ग गंगाराम का कहना है, “हर चुनाव में नेता लोग आते हैं, वादा करते हैं कि इस बार रोड बनवाएंगे। लेकिन जैसे ही वोट पड़ते हैं, फिर कोई मुड़कर नहीं देखता। हमने खुद रास्ता बनाया, लेकिन उसमें भी सरकार ने कोई मदद नहीं की।”

महिला समूह की अध्यक्ष बताती हैं, “हमने कई बार ब्लॉक और तहसील स्तर पर अधिकारियों को ज्ञापन दिए हैं। अधिकारियों ने सर्वे की बात भी कही, पर अब तक न कोई सर्वे हुआ, न रोड बनी।”

सामाजिक उपेक्षा भी एक बड़ी वजह: SC बाहुल्य गांव फिर भी उपेक्षित

अघरिया (रौलजांगल, चीनिया) एक अनुसूचित जाति (SC) बाहुल्य गांव है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की सामाजिक स्थिति के कारण वर्षों से योजनाएं यहां तक नहीं पहुंचतीं।

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता पंकज कहते हैं,

“हमारे गांव में विकास के नाम पर सिर्फ वादे हुए हैं। सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन सड़क आज भी सपना है। क्या सिर्फ इसलिए कि हम SC वर्ग से हैं?”

यह सवाल सिर्फ स्थानीय प्रशासन से नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय व्यवस्था से भी है।

बीमार को कंधे पर ले जाना पड़ता है

गांव के युवा राहुल बताते हैं, “गांव में अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे कंधे पर उठाकर या चारपाई पर बांधकर 4-5 किलोमीटर नीचे मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है। कई बार तो समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से मरीज की जान चली जाती है।”

स्कूल जाने में बच्चों को होती है दिक्कत

अघरिया (रौलजांगल, चीनिया) के बच्चों को स्कूल जाने के लिए 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें ज्यादातर रास्ता फिसलन भरा और ऊबड़-खाबड़ है। बरसात के समय बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है क्योंकि रास्ता न सिर्फ फिसलन भरा हो जाता है, बल्कि नाले उफान पर होते हैं, जिन्हें पार करना खतरे से खाली नहीं होता।

ग्रामीणों की मांग – जल्द बने पक्की सड़क

गांव के लोगों की एक ही मांग है कि सरकारी योजना के तहत एक पक्की सड़क जल्द से जल्द बनाई जाए ताकि गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से स्थाई रूप से जुड़ सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क बन जाए तो उनकी फसल समय से बाजार तक पहुंच सकती है, स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकती हैं, और बच्चों की पढ़ाई में भी रुकावट नहीं आएगी

क्या कहती है स्थानीय प्रशासन?

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि गांव तक सड़क पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। क्षेत्रीय विधायक और जिला पंचायत सदस्य को भी इस बारे में जानकारी दी गई है। अधिकारी यह भी कहते हैं कि सरकारी योजनाओं में प्रस्ताव शामिल कर भेजे गए हैं, लेकिन भू-स्वामित्व, वन भूमि आदि कारणों से प्रक्रिया में देरी हो रही है।



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