उत्तराखंड में आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन संकट, 20 साल सेवा के बाद भी 20 हजार से कम वेतन
हल्द्वानी – उत्तराखंड में संविदाकर्मियों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हल्द्वानी के राजकीय मेडिकल कॉलेज और सुशीला तिवारी अस्पताल में कार्यरत लगभग 659 उपनल कर्मचारी पिछले पांच माह से वेतन न मिलने के कारण गहरे आर्थिक संकट में हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई कर्मचारी 20 वर्षों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनका मासिक वेतन अब तक 20 हजार रुपये तक भी नहीं पहुंच पाया है।
पांच माह से वेतन न मिलने पर विरोध
लंबे समय से वेतन का भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और किराया चुकाना तक मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारी किराये के मकानों में रहते हैं और पैसों की तंगी के चलते मकान मालिकों को किराया भी नहीं दे पा रहे हैं। इसको लेकर उपनल कर्मियों ने रोजाना धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। साथ ही अस्पताल में रोज तीन घंटे का कार्य बहिष्कार भी जारी है।
सीएम से लेकर कुमाऊं आयुक्त तक गुहार
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या कुमाऊं आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचाई है, लेकिन अब तक वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। उपनल कर्मचारी शंभू दत्त बुधानी, विनोद मौर्या और नीलम बिष्ट ने बताया कि उन्होंने 20 साल से अधिक सेवाएं दी हैं, फिर भी उनका वेतन 20 हजार रुपये भी नहीं हो पाया है। महंगाई के दौर में इतने कम वेतन में गुजारा करना बेहद कठिन हो गया है।
बढ़ती महंगाई और स्थिर वेतन
कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले दो दशकों में महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन उनका वेतन लगभग स्थिर है। ऐसे में लंबे समय से सेवा देने के बावजूद जीवनयापन बेहद मुश्किल हो गया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द वेतन का भुगतान और वेतन वृद्धि की ठोस व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।



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