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गांव की बागडोर अब 21 साल की प्रियंका नेगी के हाथों में

कर्णप्रयाग/गैरसैंण (चमोली), 31 जुलाई 2025मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आदर्श ग्राम घोषित किए गए सारकोट गांव की जनता के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है। महज 21 वर्ष 3 माह की प्रियंका नेगी ने ग्राम प्रधान का चुनाव जीतकर ऐसा रिकॉर्ड बनाया कि वह चमोली जिले की सबसे कम उम्र की प्रधान बन गईं ।

स्थानीय मतगणना सुबह आठ बजे से शुरू हुई। प्रियंका नेगी को कुल 421 वोट प्राप्त हुए, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी प्रियंका देवी को सिर्फ 235 वोट मिले—जिससे स्पष्ट रूप से उनकी लोकप्रियता और विश्वास झलकता है। इससे पहले प्रियंका के पिता राजे सिंह नेगी दो बार ग्राम प्रधान रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि बेटी को राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन उन्होंने ही दिया है ।

सारकोट गांव चमोली जिले के गैरसैंण विकासखंड में स्थित है और लगभग 300 से अधिक परिवारों का घर है। पलायन की समस्या न होने के कारण मुख्यमंत्री धामी ने इसे आदर्श ग्राम घोषित किया था। उस समय से यहां मशरूम उत्पादन, स्वास्थ्य शिविर, पशुपालन, कृषि विकास, घरों का रंगीकरण, महिलाओं के लिए जागरूकता शिविर जैसे कई विकास प्रयास शुरू हुए थे ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रियंका नेगी को फोन कर जीत की बधाई दी और कहा कि वे मिलकर गांव में आगे के विकास कार्य करेंगे। उन्होंने जिलाधिकारी और अन्य स्थानीय अधिकारियों से सारकोट के निरीक्षण और योजनाओं को शीघ्रता से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है ।

प्रियंका नेगी ने जीत के बाद गांव के समक्ष अपनी प्राथमिकताओं के बारे में कहा कि वे मुख्यमंत्री द्वारा आरंभित सभी विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगी। साथ ही, ग्रामीण महिलाओं की सशक्तता उनकी मुख्य चिंता होगी, ताकि महिलाएं स्वरोजगार क्षेत्रों में आगे आ सकें  । उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि राजनीति शास्त्र स्नातक की है, जिनकी परिणाम तीन दिन पहले घोषित हुए थे ।

उनके पिता ने भी समर्थन जताया कि पूरे गांव के विकास के लिए वे अपनी बेटी का हरसंभव साथ देंगे ।

प्रियंका नेगी की इस जीत को गांव में नई ऊर्जा का प्रतीक माना जा रहा है। शहरीकरण, युवाओं की भाग-दौड़, सांस्कृतिक परिवर्तनों को देखते हुए एक युवा और शिक्षित महिला का नेतृत्व ग्रामीण भारत के लिए सकारात्मक बदलाव का संदेश रखता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि युवा नेतृत्व अब ग्रामीण राजनीति में भी मजबूत स्थान बना रहा है।

सारकोट गाँव को मुख्यमंत्री धामी ने गोद लिया हुआ है, जिससे गांव में विकास योजनाओं की गति बनी हुई है। अब प्रियंका नेगी युवा नेतृत्व के साथ इस गांव को नई दिशा देने का इरादा रखती हैं—चाहे वह कृषि, स्वास्थ्य, महिला जागरूकता या स्वरोजगार हो।


यह घटना न केवल सारकोट, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकती है, जहाँ युवा विशेषकर महिलाएं ग्रामीण नेतृत्व की नई मिसाल पेश कर रही हैं। प्रियंका नेगी की यह जीत न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि गांव और युवा शक्ति दोनों के लिए ऐतिहासिक मोड़ है।

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