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सिडकुल की एक बड़ी कंपनी में पहुंची पुलिस, जानिए क्यों हुआ खास आयोजन

पंतनगर/ऊधमसिंहनगर।

जनपद ऊधमसिंहनगर में साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस का जनजागरूकता अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार 12 अगस्त 2025 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्री मणिकांत मिश्रा के निर्देशानुसार, साइबर अपराध प्रकोष्ठ ऊधमसिंहनगर की टीम ने सिडकुल पंतनगर स्थित V-Guard कंपनी में एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कंपनी के सैकड़ों कर्मचारियों को डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों और उनसे बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

डिजिटल अरेस्ट से बचाव पर जोर

कार्यक्रम की शुरुआत ‘डिजिटल अरेस्ट’ विषय से हुई, जो हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में से एक है। साइबर क्राइम टीम ने बताया कि कुछ अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, सरकारी एजेंसी या जांच एजेंसी का सदस्य बताकर फोन, व्हाट्सएप कॉल या ईमेल के जरिए लोगों को डराते हैं। वे फर्जी गिरफ्तारी नोटिस, वारंट या वीडियो कॉल दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लाते हैं और फिर पैसे की मांग करते हैं।
कर्मचारियों को समझाया गया कि ऐसे किसी भी मामले में घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस को सूचित करें।

सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की सलाह

कार्यक्रम के दूसरे चरण में सोशल मीडिया के बढ़ते दायरे और उससे जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई। टीम ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निजी जानकारी साझा करने से होने वाले खतरों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि लोकेशन, बैंकिंग डिटेल, पहचान पत्र की फोटो या पासवर्ड जैसी जानकारी साझा करना साइबर अपराधियों के लिए अवसर पैदा करता है।
कर्मचारियों को मजबूत पासवर्ड बनाने, पासवर्ड नियमित बदलने और Two-Factor Authentication (दो-स्तरीय सुरक्षा) का प्रयोग करने की सलाह दी गई।

ऑनलाइन गेमिंग के खतरे

साइबर क्राइम टीम ने ऑनलाइन गेमिंग के दुष्परिणामों पर भी चेतावनी दी। बताया गया कि कई गेमिंग ऐप्स के जरिए बच्चों और युवाओं को गेम की लत लगाकर मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है। कई मामलों में गेमिंग चैट के जरिए उन्हें आपराधिक गतिविधियों या ठगी के जाल में फंसाया जाता है। अभिभावकों से अपील की गई कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।

साइबर बुलिंग, स्टॉकिंग, ग्रूमिंग और साइबर स्लेवरी

सत्र में साइबर बुलिंग (ऑनलाइन बदसलूकी), स्टॉकिंग (लगातार ऑनलाइन पीछा करना), ग्रूमिंग (ऑनलाइन धोखे से संबंध बनाकर शोषण) और साइबर स्लेवरी (ऑनलाइन धमकी देकर मजबूरन काम करवाना) जैसे गंभीर अपराधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। टीम ने समझाया कि इन अपराधों की पहचान समय रहते करना बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित को तुरंत मदद मिल सके।

महत्वपूर्ण सुझाव

साइबर क्राइम ब्रांच टीम ने कर्मचारियों को कुछ आसान लेकिन बेहद प्रभावी उपाय अपनाने की सलाह दी—

  • किसी संदिग्ध लिंक या अज्ञात अटैचमेंट को कभी न खोलें।

  • बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी किसी को भी ऑनलाइन साझा न करें।

  • पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहें।

  • संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें।

पुलिस की अपील

जनपद ऊधमसिंहनगर पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे जागरूक और सतर्क रहें। एसएसपी मणिकांत मिश्रा का मानना है कि “साइबर अपराध से बचाव का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता है।” उन्होंने कहा कि पुलिस का प्रयास है कि ऐसे कार्यक्रम कंपनियों, स्कूल-कॉलेज और ग्राम स्तर तक आयोजित किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर अपराध से सुरक्षित रह सकें।

इस तरह के जागरूकता अभियानों से न केवल आम जनता साइबर अपराध की पहचान कर पाएगी, बल्कि समय रहते सही कदम उठाकर खुद को आर्थिक और मानसिक नुकसान से भी बचा सकेगी। ऊधमसिंहनगर पुलिस का यह प्रयास डिजिटल युग में सुरक्षा की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।

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