बरामधार को मिली पढ़ी-लिखी प्रधान, पुष्पा देवी और पति मोहन चंद्र मिलकर करेंगे गाँव का कायाकल्प
नैनीताल, ओखलकांडा
नैनीताल ज़िले के ओखलकांडा ब्लॉक के ग्राम बरामधार में इस बार त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन 2025 में परिवर्तन की बयार देखने को मिली। यहाँ प्रधान पद पर स्नातक शिक्षित पुष्पा देवी ने अपने विरोधी उम्मीदवार को 52.82% मत पाकर पराजित किया और एक नई सोच के साथ गांव की कमान संभालने की तैयारी कर ली।
पुष्पा देवी का चुनावी सफर गाँव के युवाओं और महिलाओं के बीच चर्चा का विषय रहा। उनका कहना है कि गाँव की वास्तविक समस्याओं और विकास की जरूरतों को देखते हुए उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। उनकी जीत को न केवल महिलाओं की सशक्त भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है, बल्कि यह गाँव की सोच में आ रहे बदलाव का भी संकेत है, जहाँ लोग अब जातिगत, परंपरागत और रिश्तेदारी आधारित राजनीति से ऊपर उठकर योग्यता और कार्यकुशलता को महत्व दे रहे हैं।
पुष्पा देवी के पति मोहन चंद्र एक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने एम.ए. और बी.एड. करने के बाद हल्द्वानी के एक प्रतिष्ठित संस्थान में नौकरी की, लेकिन उनका मन हमेशा अपने गाँव और समाज सेवा में लगा रहा। उन्होंने गाँव की युवापीढ़ी के बीच शिक्षा, रोजगार और स्वावलंबन को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया। मोहन चंद्र की सोच और सामाजिक कार्यों ने ही पुष्पा देवी को चुनाव लड़ने की प्रेरणा दी।
गाँव के लोगों का मानना है कि पुष्पा देवी और उनके पति का अनुभव और दृष्टिकोण बरामधार के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। विशेषकर गाँव के युवाओं को उनसे उम्मीद है कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाएँगी।
चुनाव प्रचार के दौरान पुष्पा देवी ने घर-घर जाकर लोगों से संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और उनके समाधान के लिए योजनाएं बताईं। उन्होंने महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाओं, साफ-सफाई, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार, साथ ही युवाओं के लिए खेल और कौशल विकास केंद्र खोलने का वादा किया। यही वजह रही कि उन्हें महिलाओं और युवाओं का भरपूर समर्थन मिला।
जीत के बाद पुष्पा देवी ने कहा,
"गाँव की समस्याओं को करीब से देखने और समझने के बाद ही मैंने चुनाव लड़ने का मन बनाया। यह जीत मेरी अकेले की नहीं है, बल्कि यह पूरे गाँव के विश्वास और एकता की जीत है। आने वाले समय में मैं हर उस वादे को पूरा करने का प्रयास करूंगी जो मैंने चुनाव के दौरान किया है।"
बरामधार की इस जीत को गाँव के बुजुर्गों ने भी सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया है। उनका कहना है कि पहले यहाँ चुनाव पारंपरिक तरीके से होते थे, जहाँ अक्सर वोट जातिगत और रिश्तेदारी के आधार पर डाले जाते थे, लेकिन इस बार लोगों ने एक पढ़ी-लिखी और समाजसेवा के लिए समर्पित उम्मीदवार को मौका देकर यह साबित कर दिया कि अब गाँव विकास की दिशा में सोच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुष्पा देवी जैसे युवाओं के नेतृत्व में गाँवों में बदलाव की रफ्तार तेज होगी। उनकी शिक्षा और उनके पति का सामाजिक अनुभव बरामधार को एक मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पुष्पा देवी अपने वादों को किस तरह जमीनी हकीकत में बदलती हैं और गाँव के विकास की दिशा तय करती हैं।



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