कैसे फटता है बादल? जानिए उत्तराखंड में बार-बार क्यों आती है तबाही
द कुमाऊं कनेक्शन, रिपोर्ट गोकुल चन्द्र
बादल फटना क्या होता है?
बादल फटना (Cloudburst) एक तीव्र वर्षा की घटना होती है, जब बहुत कम समय में बहुत अधिक वर्षा एक छोटे इलाके में गिरती है। आमतौर पर यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में होती है, जहां वातावरण में नमी अचानक संघनित होकर धरती पर भारी बारिश के रूप में गिरती है।
यह बारिश इतनी तेज़ होती है कि 100 मिमी से ज्यादा पानी महज एक घंटे में गिर सकता है।
कैसे फटता है बादल?
-
गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी परतों से टकराकर संघनित होती है।
-
जब बादल में पानी की मात्रा अत्यधिक हो जाती है और वह एकसाथ गिरता है — उसे "बादल फटना" कहते हैं।
-
इसमें बिजली, तेज़ गरज और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
उत्तराखंड में बादल फटने की प्रमुख घटनाएं और नुकसान
1. केदारनाथ आपदा (16-17 जून 2013)
-
स्थान: केदारनाथ, रुद्रप्रयाग
-
कारण: बादल फटना + ग्लेशियर पिघलना
-
नुकसान:
-
5,000 से अधिक मौतें
-
लाखों लोगों की संपत्ति नष्ट
-
पूरा कस्बा मलबे में दब गया
-
देश की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक
-
2. धारचूला, पिथौरागढ़ (20 जुलाई 2021)
-
नुकसान:
-
कई घर बह गए
-
करीब 15 मौतें
-
नेपाल सीमा तक बर्बादी का दृश्य
-
सड़कें, पुल टूटे, संचार ठप
-
3. रामगढ़, नैनीताल (अक्टूबर 2021)
-
नुकसान:
-
100 साल में सबसे ज्यादा बारिश
-
50 से ज्यादा लोगों की मौत
-
पर्यटन पूरी तरह प्रभावित
-
नैनीताल झील का जलस्तर ओवरफ्लो
-
4. उत्तरकाशी (5 अगस्त 2025)
-
स्थान: धराली बाजार, भटवाड़ी तहसील
-
स्थिति: बादल फटने से मलबा आया
-
नुकसान: होटल, दुकानें क्षतिग्रस्त
-
कार्रवाई: SDRF, NDRF, आर्मी, एयरफोर्स राहत कार्य में लगे
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
-
जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई इसके पीछे बड़ी वजहें हैं।
-
ग्लेशियर क्षेत्रों के पास निर्माण कार्य और अनियोजित पर्यटन भी इसे बढ़ावा देते हैं।
-
पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी को समझे बिना हो रहे विकास से आपदा और विकराल हो रही है।
📢 क्या करें? (सुझाव और समाधान)
-
आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करें।
-
कमजोर ढांचों को हटाएं या सुरक्षित बनाएं।
-
स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण दें — Search & Rescue की जानकारी जरूरी है।
-
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण जरूरी है।


Post a Comment