79 हजार के बिल पर अटकी इंसानियत? हल्द्वानी के अस्पताल पर गंभीर आरोप
हल्द्वानी। शहर के एमबीपीजी डिग्री कॉलेज के पीछे स्थित चंदन अस्पताल पर इलाज का पूरा बिल न चुकाने पर महिला का शव रोकने का गंभीर आरोप लगा है। मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से किए जाने के बाद पुलिस हरकत में आई और अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी दी गई। इसके बाद देर रात महिला का शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अल्मोड़ा जिले के धौलछीना क्षेत्र निवासी नंदन सिरसिया ने बताया कि उनकी पत्नी सीमा (43) लंबे समय से मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर से पीड़ित थीं। शनिवार दोपहर करीब दो बजे उन्हें गंभीर हालत में हल्द्वानी के चंदन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, भर्ती से पहले ही सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी और इलाज के लिए लगभग 50 हजार रुपये भी जमा कराए गए थे।
नंदन सिरसिया का आरोप है कि इलाज के दौरान उनकी पत्नी की हालत बिगड़ती चली गई और शनिवार शाम करीब 6:40 बजे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने कुल 79 हजार रुपये का बिल बताया और पूरा भुगतान न होने तक शव देने से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति स्पष्ट की और कुछ राशि की छूट देने का अनुरोध किया, लेकिन इसके बावजूद शव रोके जाने की बात कही गई।
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मामले से आहत परिजनों ने इसकी शिकायत एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी से की। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और प्रबंधन से बातचीत की। पुलिस हस्तक्षेप के बाद रात करीब 11 बजे शव परिजनों को सौंप दिया गया।
इस मामले में चंदन अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. प्रवेन्द्र ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अस्पताल में इस तरह की कोई प्रक्रिया नहीं है और मरीजों या उनके परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाता। वहीं, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने स्पष्ट कहा कि पैसों के अभाव में किसी का शव रोकना अवैध है और भविष्य में इस तरह की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।


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