उत्तराखंड में बेरोज़गारी का सच: चौकीदार की नौकरी के लिए डिग्री छुपा रहे युवा
हल्द्वानी,
उत्तराखंड में बेरोज़गारी की स्थिति किस कदर गंभीर हो चुकी है, इसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड शिक्षा विभाग में निकली आउटसोर्सिंग आधारित भर्ती से सामने आया है। विभाग में चौकीदार-स्वच्छक के 2364 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही युवाओं में जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
यह भर्ती रोज़गार प्रयाग पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह आउटसोर्सिंग के आधार पर की जा रही है। भर्ती की सबसे चौंकाने वाली शर्त यह है कि इन पदों के लिए न्यूनतम और अधिकतम योग्यता केवल आठवीं पास रखी गई है। इससे अधिक पढ़े-लिखे उम्मीदवारों को आवेदन के दौरान ही अयोग्य घोषित किया जा रहा है।
स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएट भी लाइन में
इस भर्ती में बड़ी संख्या में ऐसे युवा सामने आए हैं जो स्नातक, पोस्ट ग्रेजुएट और तकनीकी डिप्लोमा धारक हैं। वर्षों तक पढ़ाई करने के बावजूद जब उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिली, तो मजबूरी में उन्होंने आठवीं पास योग्यता वाली इस भर्ती में आवेदन किया।
लेकिन जैसे ही दस्तावेज़ों की जांच हुई, अधिक पढ़े-लिखे होने के कारण उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए। इससे युवाओं में नाराज़गी और निराशा दोनों बढ़ गई हैं।
युवाओं ने रखी अपनी बात
एक आवेदक ने बताया कि उन्होंने एमबीए और बीएड किया है, लेकिन वर्षों से नौकरी नहीं मिली। उन्होंने मजबूरी में चौकीदार पद के लिए आवेदन किया, पर “ओवर क्वालिफाइड” बताकर आवेदन रिजेक्ट कर दिया गया। तथा एक अन्य उम्नेमीदवार ने कहा कि उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और 20 साल की उम्र से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। उम्र बढ़ती जा रही है, इसलिए अब छोटी नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन यहां भी बाहर कर दिया गया।
युवाओं का कहना है कि पढ़ाई करने के लिए सरकार प्रेरित करती है, लेकिन जब नौकरी की बात आती है तो वही पढ़ाई अयोग्यता बन जाती है।
भर्ती से जुड़ी अहम जानकारी
- कुल पद: 2364 (चौकीदार व स्वच्छक)
- भर्ती प्रक्रिया: आउटसोर्सिंग के माध्यम से
- वेतन: लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह
- आवेदन की अंतिम तिथि: 5 मार्च 2026
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प्रशासन का पक्ष
रोज़गार प्रयाग पोर्टल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भर्ती पूरी तरह तय नियमों के अनुसार की जा रही है। चूंकि पद चतुर्थ श्रेणी और आउटसोर्सिंग के हैं, इसलिए निर्धारित योग्यता से अधिक पढ़े-लिखे अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता।
बेरोज़गारी की भयावह सच्चाई
यह भर्ती उत्तराखंड में फैल रही संरचनात्मक बेरोज़गारी को उजागर करती है। राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर नहीं बन पा रहे हैं।
नतीजा यह है कि—
- युवा छोटी नौकरियों के लिए मजबूर हैं
- आउटसोर्सिंग सिस्टम में अस्थिर रोजगार मिल रहा है
- पढ़ाई का सामाजिक और आर्थिक मूल्य गिरता जा रहा है।
निष्कर्ष
चौकीदार-स्वच्छक की यह आउटसोर्सिंग भर्ती केवल एक नौकरी की खबर नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य पर खड़े बड़े सवालों की तस्वीर है। जब स्नातक युवाओं को आठवीं पास की नौकरी के लिए भी संघर्ष करना पड़े और फिर वहां भी उन्हें बाहर कर दिया जाए, तो यह बेरोज़गारी की गंभीर चेतावनी है।
अब ज़रूरत है कि सरकार आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम करे और युवाओं की योग्यता के अनुरूप स्थायी रोजगार नीति बनाए, ताकि शिक्षा बोझ नहीं, ताकत बन सके।

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