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नौकरी की भूख ऐसी कि चौकीदार पद भी सपना बन गया, 2364 सीटों पर 48 हजार युवा कतार में

देहरादून,

 राज्य के सरकारी स्कूलों में चौकीदार के पदों पर भर्ती को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। कुल 2364 पदों के सापेक्ष अब तक 48 हजार 834 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। यानी औसतन एक पद के लिए करीब 20 से अधिक बेरोजगार युवा लाइन में खड़े हैं। यह आंकड़ा राज्य में बेरोजगारी की गंभीर तस्वीर को उजागर करता है।

13 जिलों में होनी है नियुक्ति

यह भर्ती राज्य के 13 जिलों में की जानी है। शिक्षा विभाग ने चार फरवरी से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। आवेदन प्रयाग पोर्टल के माध्यम से लिए जा रहे हैं। आवेदन के लिए अभ्यर्थियों को एक माह का समय दिया गया था।

न्यूनतम योग्यता 10वीं, फिर भी ग्रेजुएट्स की भीड़

चौंकाने वाली बात यह है कि चौकीदार पद के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 10वीं पास रखी गई है, लेकिन इसके बावजूद कई ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया है। यह साफ दर्शाता है कि प्रदेश में पढ़े-लिखे युवाओं को भी स्थायी रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

जिलावार पद और आवेदन की स्थिति

जिलों में पदों और आवेदनों की स्थिति कुछ इस प्रकार है—

  • पौड़ी: 340 पद – 4400 आवेदन
  • टिहरी: 268 पद – 4804 आवेदन
  • नैनीताल: 208 पद – 3356 आवेदन
  • पिथौरागढ़: 197 पद – 5736 आवेदन
  • देहरादून: 195 पद – 2195 आवेदन
  • यूएसनगर: 182 पद – 3555 आवेदन
  • चमोली: 179 पद – 4625 आवेदन
  • उत्तरकाशी: 135 पद – 5590 आवेदन
  • चंपावत: 120 पद – 2353 आवेदन
  • रुद्रप्रयाग: 106 पद – 2529 आवेदन
  • हरिद्वार: 91 पद – 2724 आवेदन
  • बागेश्वर: 89 पद – 2517 आवेदन

कुल: 2364 पद – 48,834 आवेदन

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बेरोजगारी पर बड़ा सवाल

इन आंकड़ों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब चौकीदार जैसे चतुर्थ श्रेणी पद के लिए भी हजारों आवेदन आ रहे हैं, तो उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के अवसर आखिर कहां हैं?

स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता का भरोसा

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

निष्कर्ष

सरकारी स्कूलों में चौकीदार भर्ती न केवल एक सामान्य नियुक्ति प्रक्रिया है, बल्कि यह उत्तराखंड में बेरोजगारी की हकीकत और युवाओं की मजबूरी को भी सामने लाती है। अब देखना होगा कि भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है।



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