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उत्तराखंड में वनाग्नि पर सख्ती: शासन ने जिलाधिकारियों को दिए कड़े निर्देश, ग्राम प्रधान और सरपंच अब निभाएंगे ‘फायर वार्डन’ की भूमिका

देहरादून। उत्तराखंड शासन ने प्रदेश में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने समस्त जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आग पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही, वन क्षेत्रों में ओण/आड़ा/केड़ा जलाने की परंपरा को 1 अप्रैल के बाद पूरी तरह प्रतिबंधित करने के निर्देश दोबारा जारी किए गए हैं।



प्रमुख सचिव ने निर्देश में कहा कि वनाग्नि नियंत्रण हेतु सभी तहसीलों और ब्लॉकों में Incident Response System (IRS) की टीमें तत्काल गठित की जाएं। अभी तक केवल पौड़ी और पिथौरागढ़ जिलों ने यह कार्यवाही की है।



यह उठाए जाएंगे मुख्य कदम:

  • वनाग्नि रोकथाम के लिए ब्लॉक/तहसील स्तर पर IRS टीमें बनेंगी।

  • किसी भी परिस्थिति में ओण/आड़ा/केड़ा जलाने पर रोक रहेगी।

  • यदि आवश्यकता हो तो ग्राम प्रधान, वन सरपंच, राजस्व अधिकारी आदि की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

  • आड़ा फुकान से वन में आग लगने की स्थिति में संबंधित पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • सप्ताहिक समीक्षा जिलाधिकारी स्वयं करेंगे और वन विभाग को सहयोग देंगे।

  • आपात स्थिति में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की मदद ली जाएगी और अन्य विभागों के वाहन अधिग्रहित किए जा सकेंगे।

  • शरारती तत्वों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वनाग्नि के प्रति सरकार की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि संबंधित सभी उच्च अधिकारियों, पुलिस व आपदा विभागों को इसकी सूचना भेजी गई है। शासन ने जिलाधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे समय रहते आवश्यक कदम उठाकर राज्य के बहुमूल्य वन संपदा की रक्षा करें।



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