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उत्तराखंड में पंचायत चुनाव टलने के आसार, ओबीसी आरक्षण बना रोड़ा

न्यूज रिपोर्ट – द कुमाऊं कनेक्शन

देहरादून। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव समय पर हो पाएंगे या नहीं, इस पर अब संशय गहराता जा रहा है। एक ओर चारधाम यात्रा की तैयारियों में पूरी सरकारी मशीनरी जुटी है, तो दूसरी ओर पंचायत एक्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर संशोधन के लिए अब तक अध्यादेश जारी नहीं हो पाया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि 1 जून को जिला पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे और कार्यकाल को आगे बढ़ाना पड़ सकता है।

प्रदेश के हरिद्वार जिले को छोड़कर अन्य 12 जिलों में पंचायत चुनाव होने हैं, लेकिन इससे पहले ओबीसी आरक्षण को लागू करने के लिए पंचायत अधिनियम में संशोधन जरूरी है। नियम के अनुसार, आरक्षण तय करने के बाद उसका प्रकाशन, आपत्तियां आमंत्रित करना, उनकी सुनवाई और अंतिम सूची तैयार कर अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जानी है। इसमें समय लगना तय है।

इस बीच चारधाम यात्रा भी शुरू हो चुकी है, जिसमें राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पूर्ण रूप से व्यस्त हो जाएगी। इससे पंचायत चुनाव की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।

विकास पर असर
राज्य त्रिस्तरीय पंचायत संगठन के प्रदेश संयोजक जगत सिंह मर्तोलिया ने कहा कि पंचायतों में नई कार्यकारिणी के गठन में देरी से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। करीब 12 करोड़ रुपये की राज्य और वित्त आयोग की धनराशि खर्च नहीं हो पा रही है। ग्राम सभाओं की बैठकें न होने से विधवा पेंशन जैसी लाभकारी योजनाओं के लिए लाभार्थियों का चयन भी नहीं हो पा रहा।

क्या बोले अधिकारी
पंचायतीराज विभाग के सचिव चंद्रेश कुमार का कहना है कि विभाग चुनाव की तैयारियों में जुटा है और 28 दिन की प्रक्रिया में चुनाव कराए जा सकते हैं। वहीं राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि जैसे ही सरकार से आरक्षण की सूची प्राप्त होगी, चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


निष्कर्ष
चारधाम यात्रा और आरक्षण संबंधी प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण पंचायत चुनावों की तिथि टल सकती है। सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच समन्वय बना रहा तो चुनाव समय पर भी हो सकते हैं, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।


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