"दो मुट्ठी चावल" वाला आदेश बना मुसीबत, लोहाघाट के अधिशासी अभियन्ता से विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण
लोहाघाट/देहरादून, 16 मई 2025
उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग (PWD) में एक अनोखा आदेश सुर्खियों में बना हुआ है। लोहाघाट स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग खण्ड के अधिशासी अभियन्ता श्री आशुतोष कुमार द्वारा 16 मई 2025 को जारी एक कार्यालय आदेश में सेवा पुस्तिका गुम होने पर 'दैवीय आस्था' के तहत सभी कर्मचारियों से दो मुट्ठी चावल लाने को कहा गया था। अब यह मामला उच्च स्तर तक पहुंच गया है।
प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग, उत्तराखंड देहरादून ने इस आदेश को कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन मानते हुए अधिशासी अभियन्ता श्री आशुतोष कुमार से स्पष्टीकरण तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
लोहाघाट स्थित PWD कार्यालय में कार्यरत अपर सहायक अभियन्ता इं. जय प्रकाश की सेवा पुस्तिका अलमारी से गायब हो गई। खोजबीन विफल होने पर अधिशासी अभियन्ता ने आदेश जारी किया कि सभी कर्मचारी दो मुट्ठी चावल अपने-अपने घर से लाकर मंदिर में अर्पित करें, ताकि 'दैवीय न्याय' से समाधान मिल सके।
यह आदेश वायरल हुआ और सोशल मीडिया के माध्यम से विभाग के मुख्यालय देहरादून तक पहुंच गया। इसके बाद 16 मई को जारी पत्रांक 633/206 व्यक-सा0/2025 के अंतर्गत विभागाध्यक्ष ने इसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली के विरुद्ध मानते हुए तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
क्या कहता है विभाग?
विभाग का कहना है कि "दैवीय आस्था" के आधार पर शासकीय कार्यशैली अपनाना आचरण नियमावली 2002 का उल्लंघन है। यदि समय पर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
सवाल कायम
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क्या सरकारी कार्यालयों में आस्था आधारित निर्णय लेना उचित है?
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क्या इस मामले में जिम्मेदारी तय कर सख्त कदम उठाए जाएंगे?
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और सबसे अहम, क्या इस तरह के आदेशों से सरकार की विश्वसनीयता पर असर नहीं पड़ता?
निष्कर्ष:
"दो मुट्ठी चावल" का आदेश शायद एक मानसिक राहत का तरीका रहा हो, लेकिन अब यह आदेश निलंबन या अनुशासनात्मक कार्यवाही की दिशा में बढ़ता मामला बन चुका है। यह घटना सरकारी तंत्र में प्रशासन बनाम आस्था की बहस को और गहरा कर रही है।

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