SSJ विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा कार्यशाला, प्रशिक्षुओं को दी गई डिजिटल ठगी से बचाव की जानकारी
अल्मोड़ा: साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए अल्मोड़ा पुलिस ने साइबर सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान को गति दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अल्मोड़ा के निर्देश पर साइबर सेल द्वारा गोविंद बल्लभ पंत समाज विज्ञान संस्थान, एसएसजे विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में एक सामुदायिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में बीएड एवं एमएड प्रशिक्षुओं सहित प्रोफेसरों को साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
कार्यशाला का संचालन प्रभारी साइबर सेल कुमकुम धानिक, अपर उपनिरीक्षक चंद्रमोहन पांडे एवं साइबर टीम द्वारा किया गया। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में साइबर ठगों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों से प्रशिक्षुओं को अवगत कराया। खासतौर पर डिजिटल अरेस्ट, फेक वीडियो और फोटो मॉर्फिंग, फिशिंग, साइबर स्लेवरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्लोनिंग जैसे नए ट्रेंड्स की विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी तकनीक का दुरुपयोग कर आमजन को झांसे में लेकर ठगी कर रहे हैं। ऐसे में हर नागरिक का जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत इस नंबर पर संपर्क कर सहायता ली जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान छात्रों को केवल साइबर क्राइम ही नहीं, बल्कि नशे के दुष्परिणामों, यातायात नियमों के पालन, महिला एवं बाल अपराधों से संबंधित नवीन कानूनों की भी जानकारी दी गई। साथ ही "संचार साथी" पोर्टल, डायल 112, चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन सहित अन्य महत्वपूर्ण आपातकालीन नंबरों के उपयोग व महत्व को भी बताया गया।
साइबर सेल टीम ने छात्रों से अपील की कि वे न केवल खुद सतर्क रहें बल्कि अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। उन्होंने बताया कि कई मामलों में साइबर अपराध केवल एक छोटी सी लापरवाही के कारण होता है, जैसे अनजान लिंक पर क्लिक करना, ओटीपी साझा करना या फर्जी कॉल्स पर भरोसा करना।
कार्यशाला में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और साइबर सुरक्षा से जुड़ी जिज्ञासाएं अधिकारियों से पूछीं। कार्यक्रम के अंत में सभी ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
'द कुमाऊं कनेक्शन' का विशेष संदेश:
आज के डिजिटल युग में जहां इंटरनेट ने सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं इसके खतरे भी उतने ही गंभीर हैं। साइबर ठगी के शिकार से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है - जागरूकता। 'द कुमाऊं कनेक्शन' सभी पाठकों से अपील करता है कि वे साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें और जागरूक समाज के निर्माण में भागीदार बनें।



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