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उत्तराखंड, हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव पर लगाई रोक, आरक्षण की स्थिति स्पष्ट न होने पर लिया गया फैसला

नैनीताल, 23 जून 2025 — उत्तराखंड में प्रस्तावित पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। राज्य के हाईकोर्ट ने वर्तमान में चल रही पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। यह फैसला उस समय आया जब राज्य सरकार आरक्षण व्यवस्था को लेकर न्यायालय के समक्ष स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत नहीं कर पाई।

क्या है मामला?

राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी शुरू कर दी थी। जिलों को दिशा-निर्देश भेजे जा चुके थे और आरक्षण सूची का प्रकाशन भी प्रारंभ हो गया था। लेकिन विभिन्न जिलों से आरक्षण प्रक्रिया में विसंगतियों की शिकायतें सामने आईं। खास तौर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला वर्ग के आरक्षण को लेकर आपत्तियां दायर की गईं।

इन आपत्तियों के आधार पर कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार ने पंचायत चुनावों में आरक्षण तय करते समय 2008 से लागू रोस्टर प्रणाली का पालन नहीं किया, और न ही आरक्षण का कोई वैज्ञानिक या पारदर्शी आधार प्रस्तुत किया गया।

क्या होगा अब?

इस फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनावों की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से स्थगित करनी होगी। वहीं राज्य सरकार को जल्द से जल्द हाईकोर्ट के समक्ष आरक्षण की पूरी योजना और रोस्टर विवरण प्रस्तुत करना होगा। केवल इसी स्थिति में कोर्ट आगे की कार्रवाई की अनुमति देगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस रोक के बाद पंचायत चुनाव अब पूर्व निर्धारित समय पर होना संभव नहीं रहेगा। इससे गांव स्तर की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

जनता में मिश्रित प्रतिक्रिया

जहां कुछ लोग कोर्ट के इस फैसले को न्याय की जीत बता रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव की तैयारियों में लगे लोगों में निराशा है। कई संभावित उम्मीदवारों ने पहले ही जनसंपर्क शुरू कर दिया था, अब उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।



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