पंचायत चुनावों पर लगी रोक को हटाने हाईकोर्ट पहुंची उत्तराखंड सरकार, बुधवार को होगी अहम सुनवाई
नैनीताल, उत्तराखंड। प्रदेश के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर लगी रोक को हटवाने के लिए राज्य सरकार ने एक बार फिर हाईकोर्ट का रुख किया है। मंगलवार को सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने न्यायालय में गजट नोटिफिकेशन की प्रति प्रस्तुत करते हुए यह दलील दी कि आरक्षण निर्धारण से जुड़ी नियमावली 14 जून को प्रकाशित कर दी गई थी, लेकिन "कम्युनिकेशन गैप" के कारण यह सूचना समय रहते अदालत के संज्ञान में नहीं लाई जा सकी।
इस मामले को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मेंशन किया गया। सरकार की अपील पर न्यायालय ने इस मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं की सुनवाई बुधवार, 25 जून को अपराह्न दो बजे के लिए निर्धारित कर दी है। इस दिन हाईकोर्ट में पंचायत चुनावों के भविष्य को लेकर एक निर्णायक बहस होने की उम्मीद जताई जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रदेश के 13 में से 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। केवल हरिद्वार जिला इस रोक से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने यह रोक पंचायतों में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता न होने के कारण लगाई थी।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान दीपिका किरौला व अन्य याचिकाओं को भी सुना गया, जिन्हें अब एक साथ मुख्य सुनवाई में शामिल किया जाएगा। यह सभी याचिकाएं पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया, रोस्टर निर्धारण व उससे जुड़े नियमों को लेकर दायर की गई थीं।
इनमें से एक प्रमुख याचिका बागेश्वर निवासी गणेश कांडपाल व अन्य की ओर से दायर की गई है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 9 जून व 11 जून को जारी की गई नई नियमावली को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, सरकार ने पूर्व में तय आरक्षण रोस्टर को शून्य घोषित कर नया रोस्टर लागू किया है, जिसे वर्तमान पंचायत चुनावों से ही लागू करने का निर्णय लिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार का यह निर्णय न केवल न्यायालय के पूर्व आदेशों के विरुद्ध है, बल्कि यह उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 126 का भी उल्लंघन करता है। धारा 126 के तहत आरक्षण रोस्टर में बदलाव केवल तार्किक और कानूनी आधार पर ही किया जा सकता है, लेकिन सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया के यह बदलाव किया।
सरकार की दलील है कि 9 जून को आरक्षण निर्धारण की नियमावली तैयार कर ली गई थी, और उसका गजट नोटिफिकेशन 14 जून को प्रकाशित कर दिया गया। लेकिन तकनीकी त्रुटि और संप्रेषण की कमी के कारण यह दस्तावेज समय रहते अदालत के सामने पेश नहीं हो पाया। अब जबकि गजट नोटिफिकेशन की प्रति अदालत के समक्ष रख दी गई है, सरकार को उम्मीद है कि अदालत चुनावी प्रक्रिया पर लगी रोक को हटाकर आगे का रास्ता साफ करेगी।
अब सबकी निगाहें बुधवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां हाईकोर्ट त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से जुड़ी सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करेगा। अगर अदालत सरकार की दलीलों से सहमत होती है, तो आने वाले दिनों में प्रदेश के 12 जिलों में पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी हो सकती है। लेकिन यदि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां मजबूत साबित होती हैं, तो चुनाव प्रक्रिया में और विलंब संभव है।
इस अहम मुद्दे पर होने वाली सुनवाई राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए निर्णायक मानी जा रही है, क्योंकि इससे न केवल पंचायत चुनावों का रास्ता साफ होगा, बल्कि आरक्षण प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी अदालत की मुहर लगेगी।


Post a Comment