क्या सचमुच 2026 से मदरसों का भविष्य खतरे में? पढ़ें पूरी खबर..
देहरादून / गैरसैंण, 20 अगस्त 2025 — उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा में 19 अगस्त को "उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक – 2025" पेश किया और बुधवार को इसे विधायिका से पारित कर दिया। यह राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
मुख्य प्राविधान और उद्देश्य
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प्राधिकरण की स्थापना
मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USMEA) का गठन किया जाएगा, जिसमें एक अध्यक्ष और 11 सदस्य होंगे, जिनमें से छह अल्पसंख्यक समुदायों (मुसलमान, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी) का प्रतिनिधि होंगे। अध्यक्ष को कम से कम 15 वर्ष का शिक्षण अनुभव होना आवश्यक है । -
अवधि और पुनः मान्यता
मौजूदा वर्ष 2025–26 तक मदरसों को मदरसा बोर्ड से शिक्षा देने का अधिकार रहेगा। उससे आगे 1 जुलाई 2026 से सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को नए प्राधिकरण से नए सत्र के लिए मान्यता लेना अनिवार्य होगा। मान्यता तीन सत्रों तक वैध रहेगी, उसके बाद नवीनीकरण कराना होगा । -
समावेशिता और विस्तार
अब केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदाय के शिक्षण संस्थानों को भी अल्पसंख्यक दर्जा और उससे जुड़े लाभ प्राप्त होंगे, जो कि राज्य में इस तरह का पहला कदम माना जा रहा है -
मान्यता के मानक और नियमन
संस्थानों को मान्यता हेतु सोसाइटी, ट्रस्ट या कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत होना आवश्यक होगा। साथ ही, उनके पास स्थायी भूमि होनी चाहिए और वित्तीय लेन-देन प्राधिकरण द्वारा निर्देशित बैंक खाते के माध्यम से ही किया जाएगा। छात्रों या कर्मचारियों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। मानदंडों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितताएं पाए जाने पर मान्यता रद्द भी की जा सकेगी । -
शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना
प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि शिक्षण संस्थान उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड (UBSE) द्वारा निर्धारित शिक्षा मानकों का पालन करें और मूल्यांकन में निष्पक्षता, गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे ।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
उन्होंने कहा कि अब अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता Muslim समुदाय तक सीमित नहीं रहेगी; यह विधेयक शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता, सामाजिक सद्भाव और शैक्षिक उत्कृष्टता को बढावा देगा विपक्ष और अन्य प्रतिक्रियाएं
विपक्ष ने विधेयक को लेकर हंगामा किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने यह आरोप लगाया कि इससे केवल एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है और शिक्षा व्यवस्था की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा ।
वहीं, कुछ धार्मिक नेता ने इसे संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन से जोड़ते हुए चर्चा की, लेकिन नए कानून से धार्मिक शिक्षा को नुकसान न हो, इस आश्वासन पर भरोसा जताया गया ।
सारांश
| विषय | विवरण |
|---|---|
| विधेयक का उद्देश्य | मदरसा बोर्ड को खत्म कर एक समावेशी, पारदर्शी और गुणवत्ता-समर्थक व्यवस्था लाई गई |
| प्राधिकरण (USMEA) | अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों सहित 11 सदस्यीय नियामक संस्था |
| लागू होने की तिथि | 1 जुलाई 2026 से मान्यता और निगरानी की नई व्यवस्था लागू |
| समावेशिता | मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी संस्थानों को अल्पसंख्यक लाभ |
| भविष्य की संभावना | शिक्षा में सुधार, संस्थागत जवाबदेही, और सामाजिक समावेशिता को बढ़ावा |
यह संशोधन शिक्षा क्षेत्र में उत्तराखंड के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, जो अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा और शिक्षा गुणवत्ता की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव लाता है।


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