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उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत: न्यूनतम वेतन, महंगाई भत्ता और मानदेय भुगतान पर शासनादेश जारी

देहरादून।

उत्तराखंड में उपनल (Uttarakhand Purv Sainik Kalyan Nigam Limited – UPNL) के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल के आदेशों के अनुपालन में उपनल कर्मचारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है।

यह शासनादेश जनहित याचिका संख्या 116/2018 (कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य) में दिनांक 12 नवंबर 2018 को पारित आदेशों तथा बाद में दायर अवमानना याचिका के क्रम में जारी किया गया है।


 हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश

माननीय उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को निम्नलिखित निर्देश दिए गए थे—

  1. उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित करने की प्रक्रिया अपनाई जाए।

  2. उपनल कर्मचारियों को उनके पद के अनुसार न्यूनतम वेतनमान एवं महंगाई भत्ता (DA) प्रदान किया जाए तथा एरियर का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

  3. उपनल कर्मचारियों के वेतन से GST या Service Tax की कटौती न की जाए

शासन स्तर पर निर्णय

इन निर्देशों के अनुपालन में शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि—

  • उपनल कर्मचारियों को उनके वर्तमान पद के सापेक्ष न्यूनतम वेतनमान + देय महंगाई भत्ता दिया जाएगा।

  • पात्रता की कट-ऑफ तिथि 12.11.2018 मानी जाएगी।

  • राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भुगतान चरणबद्ध रूप से किया जाएगा।


श्रेणी के अनुसार मानदेय निर्धारण

शासनादेश के अनुसार उपनल कर्मचारियों को निम्न श्रेणियों में बांटकर मानदेय दिया जाएगा—

श्रेणीवेतन लेवल
अकुशललेवल-01
अर्द्धकुशललेवल-02
कुशललेवल-04
उच्च कुशललेवल-07
अधिकारीलेवल-10

➡️ संबंधित पद के Entry Level के न्यूनतम वेतन एवं महंगाई भत्ते के आधार पर मानदेय तय होगा।
➡️ इसके अतिरिक्त कोई अन्य भत्ता देय नहीं होगा।


नियमित कर्मचारियों के समान नहीं होगा लाभ

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि—

  • उपनल कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान नहीं माने जाएंगे

  • उन्हें केवल मानदेय दिया जाएगा, न कि नियमित वेतन।

  • यदि कोई कर्मचारी स्वीकृत पद के बिना कार्यरत है, तो उसे समूह ‘घ’ के न्यूनतम वेतन के आधार पर मानदेय मिलेगा।


 अनुबंध और भुगतान प्रक्रिया

  • उपनल कर्मचारियों को संबंधित विभागों के साथ सीधा अनुबंध किया जाएगा।

  • भुगतान संबंधित विभाग द्वारा सीधे किया जाएगा।

  • पात्र कर्मचारियों की सूची विभागाध्यक्ष द्वारा अनुमोदित की जाएगी।

  • शासनादेश जारी होने के दो माह के भीतर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।


भविष्य में उपनल व्यवस्था पर रोक

शासनादेश में यह भी उल्लेख है कि भविष्य में उपनल के माध्यम से नियुक्तियां केवल राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, विशेष रूप से पूर्व सैनिकों के पुनर्वास से संबंधित कार्यों तक सीमित रहेंगी और वे भी अस्थायी होंगी।


निष्कर्ष

यह शासनादेश उत्तराखंड में वर्षों से कार्यरत हजारों उपनल कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। न्यूनतम वेतनमान, महंगाई भत्ता और GST कटौती पर रोक जैसे निर्णयों से कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। हालांकि नियमितीकरण को लेकर अभी भी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा बनी हुई है।



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