व्यावसायिक शिक्षा बंद होने पर बवाल, प्रशिक्षकों का सरकार के खिलाफ धरना 10 अप्रैल को
देहरादून,
उत्तराखंड में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम को अचानक स्थगित किए जाने से प्रदेश के सैकड़ों व्यावसायिक प्रशिक्षक-प्रशिक्षिकाएं बेरोजगारी के कगार पर पहुंच गए हैं। करीब 200 विद्यालयों की 255 लैब्स एवं 28 अतिरिक्त विद्यालयों में कार्यक्रम बंद होने से न केवल प्रशिक्षकों का भविष्य संकट में है, बल्कि लगभग 50 हजार विद्यार्थियों की कौशल आधारित शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 को आउटसोर्सिंग एजेंसी का अनुबंध समाप्त होते ही 1 अप्रैल से प्रशिक्षकों को बिना पूर्व सूचना के कार्यमुक्त कर दिया गया। इस अचानक फैसले ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षकों दोनों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
हाल ही में प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि व्यावसायिक शिक्षा को बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन बयान के एक सप्ताह बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा है।
स्किल वोकेशनल ट्रेनर्स वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तराखंड ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि कार्यक्रम बंद नहीं किया जा रहा है, तो नई टेंडर प्रक्रिया अब तक शुरू क्यों नहीं हुई और अनुभवी प्रशिक्षकों को बाहर क्यों किया गया?
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प्रशिक्षकों ने सरकार और विभाग के सामने कई अहम सवाल उठाए हैं:
- नए सत्र के शुरू होने के बावजूद पुनर्नियुक्ति में देरी क्यों?
- टेंडर समाप्त होने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
- केंद्र सरकार की गाइडलाइन के बावजूद कार्यक्रम को सीधे विभाग द्वारा संचालित क्यों नहीं किया जा रहा?
- वर्षों का अनुभव रखने वाले प्रशिक्षकों को अचानक बाहर करना क्या “यूज एंड थ्रो” नीति नहीं है?
- समान कार्य के बावजूद प्रशिक्षकों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन क्यों दिया जाता रहा?
इसके अलावा यह भी सामने आया है कि शिक्षा विभाग को संबंधित अनुबंध समाप्त होने की जानकारी एक वर्ष पूर्व ही दे दी गई थी, इसके बावजूद समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इसी मुद्दे को लेकर स्किल वोकेशनल ट्रेनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले सभी व्यावसायिक प्रशिक्षक 10 अप्रैल 2026 को परेड ग्राउंड, देहरादून में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।
मुख्य मांगें
- व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से पुनः शुरू किया जाए।
- सभी कार्यरत प्रशिक्षकों को राज्य सरकार के अधीन समायोजित या नियमित किया जाए।
- प्रभावित प्रशिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा या वैकल्पिक रोजगार दिया जाए।
- भविष्य में ऐसे निर्णय लेने से पहले स्पष्ट और सुरक्षित नीति बनाई जाए।
आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण नेगी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अंत में मीडिया से भी अपील की गई है कि इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए, ताकि प्रशिक्षकों की आवाज सरकार तक पहुंच सके।


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