उत्तराखंड में व्यावसायिक शिक्षा पर असमंजस: आदेशों से ठप संचालन, लेकिन सरकार ने निरंतरता का दिया भरोसा
देहरादून।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए सत्र 2026–27 के लिए शासन स्तर से दिशा-निर्देश प्राप्त न होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। इससे हजारों विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों में चिंता का माहौल है।
मंत्री का निर्देश: काम नहीं रुकना चाहिए
इस बीच डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट कहा है कि व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जब तक नई टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक पुरानी एजेंसी के माध्यम से ही कार्य लिया जाए।
मंत्री ने यह भी कहा कि व्यावसायिक शिक्षा विद्यार्थियों के कौशल विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है, इसलिए इसकी निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है।
सरकारी स्तर पर जानकारी के अनुसार, 331 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के संचालन वर्तमान में जारी है। नई एजेंसी के चयन के बाद इन विद्यालयों में कार्यक्रम को और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की योजना है।
विद्यार्थियों पर असर: भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
इस फैसले का सबसे बड़ा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। राज्य में कक्षा 9 से 12 तक बड़ी संख्या में छात्र व्यावसायिक शिक्षा में पंजीकृत हैं। टेंडर समाप्त होने के कारण उनके भविष्य को लेकर विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, 200 विद्यालयों एवं 28 स्पोक स्कूलों में यह कार्यक्रम सत्र 2021-22 से संचालित हो रहा था, जिसका टेंडर 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया। ऐसे में यदि समय रहते स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुए, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और कौशल विकास प्रभावित हो सकता है।
प्रशिक्षकों की चिंता: रोजगार और स्थिरता का मुद्दा
व्यावसायिक प्रशिक्षकों का कहना है कि टेंडर आधारित व्यवस्था के कारण हर साल अनिश्चितता बनी रहती है। 1 अप्रैल से कार्यक्रम प्रभावित होने की स्थिति में उनकी सैलरी और रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है।
प्रशिक्षकों ने मांग की है कि सरकार टेंडर प्रणाली के बजाय उनके लिए स्थायी नीति बनाए, जिससे न केवल उनका भविष्य सुरक्षित हो, बल्कि विद्यार्थियों को भी निरंतर और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
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जमीनी स्थिति: आदेश और निर्देशों में भ्रम
एक ओर विभागीय आदेश में कार्यक्रम को स्थगित करने की बात कही गई है, वहीं दूसरी ओर मंत्री द्वारा इसे जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विद्यालय स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
अधिकारी, प्रशिक्षक और विद्यालय प्रबंधन सभी स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकें।
उत्तराखंड में व्यावसायिक शिक्षा को लेकर वर्तमान स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर प्रशासनिक आदेश हैं, तो दूसरी ओर सरकार की मंशा इसे जारी रखने की है।
ऐसे में सबसे जरूरी है कि जल्द स्पष्ट और एकरूप आदेश जारी किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो और प्रशिक्षकों का रोजगार भी सुरक्षित रह सके।

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